PM मोदी ने नेतन्याहू से फोन पर की बात, मध्य पूर्व में शत्रुता जल्द खत्म करने की अपील की

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
On

नई दिल्लीः मध्य पूर्व क्षेत्र भीषण संघर्ष की चपेट में है, जहां अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर तीव्र हमले किए हैं। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई सहित कई शीर्ष अधिकारी मारे गए हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने जवाबी हमलों में इज़रायल के अलावा यूएई, बहरीन, कतर और कुवैत जैसे देशों को निशाना बनाया है, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता फैल गई है।

ऐसे संकटपूर्ण समय में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से टेलीफोन पर महत्वपूर्ण बातचीत की। पीएम मोदी ने इस वार्ता के बारे में सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए बताया कि उन्होंने क्षेत्रीय स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने हालिया घटनाक्रमों को लेकर भारत की गहरी चिंता व्यक्त की और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताई। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि शत्रुता को शीघ्र समाप्त करने की आवश्यकता है।

यूएई के राष्ट्रपति से भी की बात, हमलों की निंदा की

इससे पहले पीएम मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से भी फोन पर संवाद किया। उन्होंने यूएई पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और मारे गए लोगों के प्रति गहन संवेदना जताई। पीएम मोदी ने कहा कि भारत इस मुश्किल घड़ी में यूएई के साथ पूर्ण एकजुटता से खड़ा है। उन्होंने वहां रहने वाले भारतीय समुदाय की सुरक्षा और देखभाल के लिए यूएई नेतृत्व का आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने जोर दिया कि तनाव कम करने, क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देना जरूरी है।

CCS बैठक में स्थिति की समीक्षा

ईरान पर अमेरिका-इज़रायल के हमलों और खामेनेई की मौत के बाद उत्पन्न गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अहम बैठक बुलाई। यह बैठक रविवार देर शाम पीएम आवास पर हुई, जो लगभग तीन घंटे तक चली। इसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित प्रमुख सदस्य शामिल हुए। बैठक में इज़रायल-ईरान संघर्ष के प्रभावों, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन मंथन हुआ।

भारत ने इस संकट में संतुलित रुख अपनाते हुए शांति और डी-एस्केलेशन की वकालत की है, साथ ही नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया है।

संबंधित समाचार