प्रयागराज से पहुंचीं दवाओं की खेप, 24 घंटे बाद जारी हुआ फार्मासिस्ट का खंडन वाला पत्र
अयोध्या, अमृत विचार। दर्शन नगर स्थित राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में दवाओं की आपूर्ति को लेकर एक अजब-गजब ही नहीं हास्यास्पद और संदेहास्पद मामला सामने आया है। प्रयागराज से यहां पहुंची दवाओं की बड़ी खेप को लेकर पहले तो केन्द्रीय औषधि भंडार के फार्मासिस्ट ने पल्ला झाड़ लिया। घंटों चले हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद बैकफुट पर आए फार्मासिस्ट ने आनन फानन एक और पत्र जारी कर दिया। ''अमृत विचार'' ने जब मामले की छानबीन की और छुट्टी पर गए कार्यवाहक प्राचार्य से पूछा तब राज खुला की दवाओं की आपूर्ति की डिमांड उनके द्वारा ही की गई थी।
मेडिकल कॉलेज के फार्मासिस्ट योगेश चंद्र मिश्र ने प्रभारी अधिकारी को पत्र लिखा कि केंद्रीय औषधि भंडार में कुशवाहा आरपी बीटूबीआरसी 344 बीएचएस अल्लापुर, इलाहाबाद के द्वारा 139 बॉक्स का विवरण मिला है। डिलीवरी चालान के अनुसार प्राप्तकर्ता का नाम चीफ फार्मासिस्ट स्टोर इंचार्ज राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज अंकित है, जबकि ऐसा कोई भी ऑर्डर चीफ फार्मासिस्ट/स्टोर इंचार्ज के तरफ से नहीं दिया गया है। प्राप्त बॉक्स का डिटेल स्टेटर या ऑर्डर कॉपी या बिल इनवॉइस का कोई पेपर नहीं प्राप्त हुआ है। इस संदर्भ में अग्रिम कार्रवाई हेतु सूचना दी जा रही है। यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया।
इसके बाद तो तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म होने लगा। दवाओं के अवैध होने की चर्चाएं चलने लगीं। मेडिकल कॉलेज प्रशासन की किरकिरी शुरू हो गई। 24 घंटे बाद ही 28 फरवरी को फार्मासिस्ट योगेश का दूसरा और कथित पत्र वायरल होता है। केंद्रीय औषधि भंडार के प्रभारी अधिकारी को संबोधित पत्र में कहा गया है कि 27 को मेरे द्वारा जारी किए गए पत्र में जो जानकारी दी गई थी। वह भ्रामक स्थिति उत्पन्न होने के कारण दी गई थी। पूर्व में दिए गए पत्र का वर्तमान में कोई महत्व नहीं है। कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. दिनेश सिंह मर्तोलिया ने बताया कि होली पर लगातार छुट्टियां पड़ रही हैं। इसी कारण यह दवाएं हमने मंगाई है। यह दवाएं सीधा फर्म से नियमानुसार मंगाई गई हैं। इसमें जनरल मेडिसिन हैं।
पत्र में आपूर्ति की अलग-अलग तिथियों का जिक्र
21 जनवरी 2026: 01 बॉक्स
11 फरवरी 2026: 28 बॉक्स
16 फरवरी 2026: 30 बॉक्स
25 फरवरी 2026: 80 बॉक्स
कक्ष संख्या 10 में रखे बॉक्स का वीडियो वायरल
मेडिकल कॉलेज के पुराने भवन के कमरा नंबर 10 में कुछ बॉक्स को देखते हुए कर्मचारियों का सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल खबरों के मुताबिक कमरा नंबर 10 में रखी दवाओं का न बिल बाउचर है और न ही किसी लैब से टेस्टेड हैं। दवाइयों पर गवर्नमेंट सप्लाई नॉट फॉर सेल की मुहर भी नहीं लगी है। हालांकि ''अमृत विचार'' इस संबंध में वायरल किसी भी तथ्य की पुष्टि नहीं करता है।
