बाराबंकी में आम की फसल पर हॉपर कीट का प्रकोप, विशेषज्ञों ने बताए बचाव के उपाय
बाराबंकी, अमृत विचार। बाराबंकी जिले के आम उत्पादक क्षेत्रों में इन दिनों हॉपर (भुनगा/फुदका) कीट का प्रकोप बढ़ने से किसान चिंतित हैं। कीट का प्रकोप कीटों के बढ़ते हमले ने आम के बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। इस समस्या को लेकर कृषि विज्ञान केंद्र हैदरगढ़ की कीट वैज्ञानिक डॉ. रिंकी कुमारी चौहान ने किसानों को जरूरी सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह कीट फसल को 30 प्रतिशत तक नुकसान पहुँचा सकता है।
उन्होंने बताया कि इस कीट के नियंत्रण के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन अपनाना चाहिए, जिसमें जैविक, यांत्रिक और रासायनिक तरीकों का संतुलित उपयोग शामिल है। जैविक उपायों में नीम के तेल का छिड़काव और पीले-नीले चिपचिपे फंदों का प्रयोग प्रभावी है।
साथ ही संक्रमित शाखाओं की कटाई और बगीचे में हवा व धूप के उचित प्रबंधन पर भी जोर दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक प्रकोप की स्थिति में ही रासायनिक दवाओं का सीमित उपयोग करना चाहिए। यह कीट मंजरियों और कोमल पत्तियों से रस चूसकर फसल को 30 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे फल झड़ने और गुणवत्ता में गिरावट की समस्या बढ़ जाती है।
बचाव के लिए 'एकीकृत कीट प्रबंधन' है जरूरी
डॉ. चौहान ने किसानों को केवल रसायनों पर निर्भर न रहकर एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) अपनाने का सुझाव दिया है। उन्होंने बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय बताए हैं:
जैविक उपाय: शुरुआती चरण में नीम के तेल का छिड़काव बेहद प्रभावी रहता है।
यांत्रिक विधि: कीटों को पकड़ने के लिए बागों में पीले और नीले रंग के चिपचिपे फंदे (Sticky Traps) का प्रयोग करें।
स्वच्छता और प्रबंधन: बगीचे में घनी और संक्रमित शाखाओं की समय-समय पर छंटाई करें ताकि धूप और हवा का आवागमन बेहतर बना रहे।
रासायनिक विकल्प: यदि कीट का प्रकोप बहुत अधिक हो जाए, तभी विशेषज्ञों की सलाह पर सीमित मात्रा में कीटनाशकों का प्रयोग करें।
