ईरान के नए नेतृत्व से बातचीत के ट्रंप के संकेत पर लारीजानी का सख्त जवाब, कहा- 'अमेरिका से कोई बात नहीं'
दुबईः ईरान के नए नेतृत्व से बातचीत को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दिए गए संकेतों के बीच एक शीर्ष ईरानी सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि वे वाशिंगटन से बातचीत नहीं करेंगे। ट्रंप ने रविवार को संकेत दिया था कि वह ईरान के नए नेतृत्व से बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने पत्रिका 'द अटलांटिक' से कहा, "वे बात करना चाहते हैं, मैंने बातचीत के लिए सहमति दे दी है, इसलिए मैं उनसे बात करूंगा।"
हालांकि, ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने 'एक्स' पर चेतावनी भरे लहजे में लिखा, ''हम अमेरिका से बातचीत नहीं करेंगे।'' ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद अमेरिका-इज़राइल ने रविवार को ईरान में कई जगहों पर जोरदार हमले किए तथा बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों पर बम गिराए और युद्धपोत भी तबाह कर दिए।
ईरानी नेताओं के मुताबिक, इन हमलों की शुरुआत से अब तक खामेनेई और अन्य वरिष्ठ नेताओं के अलावा 200 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। बमबारी जारी रहने के साथ यह संघर्ष अमेरिका, इजराइल और ईरान से बाहर भी फैलने का खतरा पैदा हो गया। लेबनान के चरमपंथी संगठन हिजबुल्ला ने इजराइल पर हमलों का दावा किया, जिस पर इजराइल ने जवाबी कार्रवाई की। खाड़ी देशों ने उनके अहम ठिकानों पर हुए हमलों में कम से कम पांच आम नागरिकों की मौत के बाद चेतावनी दी कि वे ईरान के खिलाफ जवाबी कदम उठा सकते हैं। ईरान ने बदले का संकल्प लेते हुए जवाबी कार्रवाई में इजराइल और अरब देशों पर मिसाइलें दागीं। इजराइल की बचाव सेवाओं के अनुसार, यरुशलम और मध्य शहर बेत शेमेश के एक प्रार्थना स्थल (सिनागॉग) समेत कई जगहों पर हमले हुए। बेत शेमेश में नौ लोगों की मौत हुई और 28 लोग घायल हुए। इसके साथ ही इज़राइल में मृतकों की कुल संख्या 11 हो गई।
पुलिस ने बताया कि हमले के बाद 11 लोग अब भी लापता हैं। लेकिन ईरान पर हमले थमते नजर नहीं आ रहे हैं। अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के महत्वपूर्ण सैन्य, राजनीतिक और खुफिया ठिकानों को निशाना बनाया। इससे प्रतीत होता है कि जंग व्यापक होती जा रही है और यह लंबे समय तक चल सकती है, जो पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता ला सकती है। अमेरिकी सेना ने रविवार को कहा कि ईरान पर अमेरिका के हमलों के दौरान उसके तीन सैनिक मारे गए और पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह पहली बार है जब इस बड़े सैन्य अभियान में अमेरिका की ओर से उसके सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए एक वीडियो में कहा कि अमेरिका अपने सैनिकों की मौत का "बदला" लेगा और संघर्ष खत्म होने से पहले "संभव है कि और भी अमेरिकी सैनिक मारे जाएं।" इजराइल के ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि 100 लड़ाकू विमानों ने एक साथ तेहरान में कई ठिकानों पर हमला किया।
उन्होंने कहा कि इन हमलों में ईरान की वायुसेना की इमारतों, मिसाइल कमान से जुड़े ठिकानों और आंतरिक सुरक्षा बल की इमारतों को निशाना बनाया गया। अमेरिका की सेना ने कहा कि 'बी-टू स्टेल्थ' विमानों ने लगभग 900 किलोग्राम वजनी बमों से ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों पर हमला किया। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान के नौ युद्धपोत डुबो दिए गए हैं और ईरानी नौसेना का मुख्यालय "काफी हद तक नष्ट" हो गया है। पिछले आठ महीनों में यह दूसरी बार है जब अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त रूप से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की। पिछले साल जून महीने में 12 दिन चले संघर्ष में इजराइली और अमेरिकी हमलों से ईरान की हवाई सुरक्षा, सैन्य नेतृत्व और परमाणु कार्यक्रम को काफी नुकसान पहुंचा था। यूरोप अब तक इस युद्ध से दूर रहा है और कूटनीतिक हल पर बल देता रहा है। लेकिन संघर्ष की लपटें दूसरे देशों तक भी पहुंचने के संकेतों के बीच, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने रविवार को कहा कि वे ईरान के हमलों को रोकने में मदद के लिए अमेरिका का साथ देंगे। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर ने कहा कि ब्रिटेन, अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों का इस्तेमाल करके ईरान के मिसाइल ठिकानों पर हमला करने की अनुमति देगा। स्टॉर्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने रविवार को संयुक्त बयान में कहा कि वे अपने सहयोगियों पर ईरान की ओर से किए गए "अविवेकपूर्ण" हमलों से बहुत खफा और स्तब्ध हैं। उन्होंने कहा कि इन हमलों से क्षेत्र में मौजूद उनके सैनिकों और आम नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।
बयान में कहा गया, "हम क्षेत्र में अपने हितों और अपने सहयोगियों के हितों की रक्षा के लिए कदम उठाएंगे जिसमें संभवतः ईरान की मिसाइलों और ड्रोन दागने की क्षमता को नष्ट करने के लिए आवश्यक और सीमित रक्षात्मक कार्रवाई करना शामिल है। इस मामले में हम अमेरिका और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर काम करने पर सहमत हुए हैं।" इसी तरह, खाड़ी के अरब देशों के एक समूह ने कहा कि उसे ईरान के हमलों का जवाब देने का अधिकार है। इन हमलों में संयुक्त अरब अमीरात में तीन लोगों के मारे जाने की सूचना है, जबकि कुवैत और बहरीन में एक-एक व्यक्ति की मौत की सूचना मिली है।
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में अधिकारियों ने कहा कि ईरान की ज्यादातर मिसाइल और ड्रोन हमलों को निष्क्रिय कर दिया गया है, लेकिन उनके मलबे गिरने के कारण मौतें हुईं और काफी नुकसान हुआ। बहरीन और कुवैत ने कहा कि दोनों देशों में ईरान की ओर से किए गए हमलों में अमेरिकी ठिकानों के बाहर नागरिकों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हमला कर ईरान ने जवाबी कार्रवाई का संकल्प जताया है। लेबनान और इराक में ईरान समर्थित सशस्त्र समूह भी इस संघर्ष में शामिल हो गए। इराक की एक शिया मिलिशिया ने सोमवार को दावा किया कि उसने राजधानी बगदाद के हवाई अड्डे पर तैनात अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाकर ड्रोन हमला किया। इजराइल ने सोमवार तड़के लेबनान की राजधानी बेरूत पर लगातार हमले किए। ये हमले तब किए गए जब इससे पहले लेबनानी चरमपंथी संगठन हिजबुल्ला ने सीमा पार इजराइल की ओर मिसाइलें दागीं।
इस बीच, इजराइली सेना ने लेबनान के लगभग 50 गांवों के लोगों से हमलों की आशंका के मद्देनजर सुरक्षित स्थानों पर चले जाने का आग्रह किया है। एक वर्ष से अधिक समय में यह पहला मौका है जब हिजबुल्ला ने इजराइल पर हमले की जिम्मेदारी ली है। इजराइली सेना ने कहा कि उसने सीमा पार से आई एक मिसाइल को हवा में ही निष्क्रिय कर दिया, जबकि कई अन्य मिसाइलें खुले इलाकों में गिरीं। इन हमलों में किसी के घायल होने या नुकसान की सूचना नहीं है। हिजबुल्ला ने एक बयान में कहा कि ये हमले ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या और ''इजराइल की बार-बार आक्रामक कार्रवाइयों'' के जवाब में किए गए हैं।
