काशी में रंगों का उत्सव : मुस्लिम महिलाओं ने होली खेलकर दुनिया को दी शांति का संदेश 

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Published By Anjali Singh
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वाराणसी। पूरी दुनिया की निगाहें इस समय ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच छिड़े तनाव पर टिकी हुई हैं। सोमवार को वहीं, काशी में मुस्लिम महिलाओं ने रंगों और गुलालों से होली खेलकर विश्व शांति का संदेश दिया। मुस्लिम महिला फाउंडेशन एवं विशाल भारत संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में लमही स्थित सुभाष भवन में गुलालोत्सव का आयोजन किया गया। 

ढोल की थाप पर होली के गीत, हँसी-ठिठोली और हवाओं में उड़ता गुलाल किसी भी धार्मिक नफरत को मिटाने की ताकत रखता है। मुस्लिम देश धार्मिक नफरत के शिकार हैं और एक-दूसरे को खत्म करने पर आमादा नजर आते हैं। सड़कों पर बिखरा खून इतिहास और भूगोल सब बदल रहा है। काशी की मुस्लिम महिलाओं ने होली खेलकर नफरत, हिंसा और कट्टरता को मिटाने तथा विश्व शांति का संदेश देने का प्रयास किया। 

महिलाओं ने कहा कि काश मुस्लिम देश भी होली मनाते, तो गले मिलने की उम्मीद जगती। भारत की संस्कृति रंगों की होली खेलकर गले मिलने का संदेश देती है, जबकि कुछ जगहों पर गला काटकर खून की होली को ही मजहब का हिस्सा माना जाता है। हिंदू महिलाओं ने अपने हाथों से मुस्लिम महिलाओं के चेहरे पर गुलाल लगाया, तो मुस्लिम महिलाएं भी पीछे नहीं रहीं। 

उन्होंने हवा में गुलाल उड़ाकर सबको रंग-बिरंगा कर दिया। गुलालोत्सव एवं होली की पोटली कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बड़कू हनुमान जी आश्रम के पीठाधीश्वर पंडित रिंकू महाराज ने अनाज बैंक की ओर से 300 बांसफोर, नट, मुसहर और मुस्लिम परिवारों की महिलाओं को होली की पोटली तथा साड़ियाँ वितरित कर उत्सव की खुशी बढ़ाई। इस अवसर पर मुस्लिम महिलाओं की प्रमुख नेता, हनुमान चालीसा फेम नाज़नीन अंसारी ने कहा, "शुक्र है कि हम भारत में रहते हैं, जहाँ की संस्कृति में रंगों और गुलालों की होली खेली जाती है। 

वरना मुस्लिम देशों में तो खून की होली को ही मजहब बताया जाता है। मुस्लिम देश यदि भगवान राम और कृष्ण के मार्ग पर चलें, तो उनके देशों में शांति आ सकती है।" उन्होंने कहा, "हिंसा, कट्टरपंथ और नफरत ने पूरी दुनिया को सिर्फ आतंकवाद दिया है। प्यारा देश भारत ने सभी को शांति का मंत्र दिया है। एकता और भाईचारे के साथ प्रेम पर आधारित हैं हमारे त्योहार। हम मजहब से चाहे कोई भी हों, लेकिन पूर्वजों और परंपराओं से एक हैं। धर्म के नाम पर नफरत फैलाने वालों को कड़ी चुनौती देते हैं कि अभी भी वक्त है, सुधर जाओ, वरना मुस्लिम देशों के हालात देख लो।

रंगों की होली खेलना हराम नहीं है, बल्कि खून की होली खेलना हराम है। रंगों की होली खेलने वाला मोहब्बत फैलाता है, इसलिए वह जन्नत जाएगा।" विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीगुरुजी ने कहा कि होली का त्योहार नफरत को खत्म कर गले मिलने के लिए ही मनाया जाता है। विश्व शांति के लिए त्योहारों का बहुत महत्व है। 

यदि होली का चलन अन्य देशों में हो, तो वहाँ नफरत की प्रवृत्ति कम होगी। इस अवसर पर डॉ. अर्चना भारतवंशी, डॉ. नजमा परवीन, डॉ. मृदुला जायसवाल, आभा भारतवंशी, परवीन, नूरजहाँ, मुस्कान, अमीना खातून, जहीरुननिशा, रहमीम, शकीला, नुसरत, सलमा, रुकसाना, रिजवाना, पिंकी, शबीना, मुन्नी, शमा, रेहाना, सलमा, नाजिया आदि महिलाएँ शामिल रहीं। 

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