फिनलैंड के साथ जॉइंट प्रेस वर्ता में बोले पीएम मोदी- केवल सैन्य टकराव से मुद्दों का समाधान संभव नहीं
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे सैन्य टकराव के बीच भारत और फिनलैंड ने कानून के शासन तथा कूटनीति पर जोर देते हुए कहा है कि केवल सैन्य टकराव से किसी भी मुद्दे का समाधान नहीं निकल सकता। दोनों देशों ने पश्चिम एशिया और यूक्रेन में संघर्ष की शीघ्र समाप्ति और शांति स्थापना पर जोर दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत यात्रा पर आये फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब के साथ गुरुवार को यहां द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस वक्तव्य में कहा कि भारत और फिनलैंड ने प्रौद्योगिकी से लेकर रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और प्रगाढ़ बनाने के लिये अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा देने का निर्णय लिया है।
दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए तीन समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किए। दोनों देशों ने कानून के शासन में विश्वास व्यक्त करते हुए वैश्विक संस्थाओं में सुधारों की वकालत की है। उन्होंने सभी तरह के आतंकवाद जड़ से समाप्त करने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।
मोदी ने विश्व में अस्थिरता और अनिश्चितता का उल्लेख करते हुए कहा कि यूक्रेन से लेकर पश्चिम एशिया तक दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि भारत और फिनलैंड दोनों कानून के शासन, बातचीत और कूटनीति में विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा, " हम एकमत हैं कि केवल सैन्य टकराव से किसी भी मुद्दे का समाधान नहीं निकल सकता। यूक्रेन हो या पश्चिमी एशिया, हम संघर्ष की शीघ्र समाप्ति और शांति के हर प्रयास का समर्थन करते रहेंगे।"
दोनों देशों के बीच सहयोग को और पुख्ता बनाने की सहमति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में दुनिया की दो बड़ी कूटनीतिक शक्तियों भारत और यूरोप का बढ़ता सहयोग वैश्विक स्थिरता, विकास और साझा समृद्धि को नई मजबूती दे रहा है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे उनके बीच व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग को और प्रबल होगा। दोनों देश डिजिटल प्रौद्योगिकी, ढांचागत और सततता जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण साझेदार हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग पर उन्होंने कहा कि नोकिया के मोबाइल फोन और दूरसंचार नेटवर्क ने करोड़ों भारतीयों को जोड़ा है।
फिनलैंड के वास्तुविदों के सहयोग से भारत ने चिनाब नदी पर विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज बनाया है। फिनलैंड की साझेदारी से भारत ने नुमालीगढ़ में दुनिया की सबसे बड़ी बांस से जैव इथेनॉल रिफाइनरी भी बनाई है। उन्होंने कहा कि इस सहयोग से प्रेरणा लेते हुए दोनों देशों ने संबंधों को डिजिटलाइजेशन और स्स्टेनेबिलिटी में रणनीतिक साझेदारी का रूप देने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा , " यह साझेदारी ए आई से लेकर 6 जी दूरसंचार , स्वच्छ ऊर्जा से लेकर क्वांटम कंप्यूटिंग ,कई हाई-टेक क्षेत्रों में हमारे सहयोग को गति और ऊर्जा देगी। साथ ही रक्षा , अंतरिक्ष , सेमीकन्डक्टर और महत्वपूर्ण खनिज जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भी साझेदारी और गहरी होगी।" प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और फिनलैंड जैसे लोकतान्त्रिक और जिम्मेदार देशों की यह रणनीतिक साझेदारी पूरे विश्व के लिए विशवसनीय प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने में योगदान देगी।
उन्होंने कहा कि दोनों देश इस बात पर भी एकमत हैं कि बढती वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए वैश्विक संस्थाओं में सुधार आवश्यक ही नहीं अविलंब होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने आतंकवाद के हर रूप को जड़ से समाप्त करने की भी प्रतिबद्धता जतायी है। श्री मोदी ने कहा कि फिनलैंड भारतीय छात्रों और प्रतिभा के लिए प्राथमिक जगह बन रहा है और दोनों देशों के नवाचार तंत्र को जोड़ने के लिए हमने फिनलैंड के साथ एक व्यापक 'माइग्रेशन एण्ड मोबिलिटी अग्रीमेंट' किया है।
उन्होंने कहा, " इसके साथ, हम संयुक्त शोध और स्टार्ट अप सहयोग को भी और मजबूत करने जा रहें हैं। शिक्षा के क्षेत्र में फिनलैंड एक आदर्श है। उन्होंने कहा," आज हमने टीचर ट्रेनिंग, स्कूल से स्कूल साझेदारी और शिक्षा के भविष्य में शोध पर सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनाई है। यानि, स्कूल से लेकर उद्योग तक, हम जन संसाधन के हर स्तर पर अपने सहयोग को नई गहराई देने जा रहे हैं।" प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वस्थ पृथ्वी हमारी साझी प्राथमिकता है और इस वर्ष फिनलैंड के साथ हम भारत में 'वर्ल्ड सर्क्युलर ईकानमी फोरम ' की मेजबानी करने जा रहे हैं। इससे सततता के प्रयासों को नई गति और नए विचार मिलेंगे।
