आदर्श-शताब्दी बनेंगे जर्जर पशु चिकित्सालय: प्राइमरी वेटरनरी हेल्थ केयर सेंटर रखा जाएगा नाम, ब्लॉक स्तरीय दिया जाएगा दर्जा

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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प्रशांत सक्सेना/लखनऊ, अमृत विचार : पशुपालन विभाग प्रदेश के सभी राजकीय पशु चिकित्सालयों को हाईटेक बनाकर ''प्राइमरी वेटरनरी हेल्थ केयर सेंटर'' नाम देगा। चिकित्सालयों का एक मानक बनेगा और उसी अनुसार विस्तार करेगा। स्ट्रैक्चर में बदलाव होगा, संसाधन और सेवाएं बढ़ाई जाएंगी। 100 वर्ष पुराने जर्जर चिकित्सालयों को शताब्दी बनाकर जिला स्तरीय दर्जा दिया जाएगा। जबकि 50 वर्ष पुराने चिकित्सालयों को आदर्श बनाकर ब्लॉक स्तरीय दर्जा दिया जाएगा।

केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार, पशुपालन विभाग चिकित्सालयों में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। हाईटेक संसाधनों के साथ चिकित्सक, पशुधन प्रसार अधिकारी, फार्मासिस्ट से लेकर फील्ड स्टाॅफ तक तैनात किया जाएगा। इससे कि पहले से बेहतर और त्वरित पशुओं का उपचार किया जा सके। पशुपालन विभाग ने सभी जिलों से पुराने व जर्जर चिकित्सालयों की रिपोर्ट मांगी है।

पांच हजार यूनिट पर एक चिकित्सक

इसके अलावा पांच हजार यूनिट (पशु) पर एक चिकित्सक तैनात किया जाएगा। छोटे पशुओं में 10 भेड़ व 10 बकरी की एक यूनिट बनाई जाएगी। इसी तरह 100 मुर्गियां या पांच सूकर की एक यूनिट बनेगी। जबकि बड़े पशुओं में एक यूनिट में एक गाय या एक भैंस होगी। इन सभी का पशुपालकों के साथ पूरा ब्योरा डिजिटल करने के साथ चिकित्सालय से मैप किया जाएगा। पशुओं की गणना करके ऑनलाइन की जाएगी।

1962 का एक होगा कंट्रोल रूम

पशुपालन विभाग अप्रैल में नया टेंडर होने पर पारदर्शिता के लिए मोबाइल वेटरनरी यूनिट (1962 सेवा) का प्रदेश स्तरीय एकीकृत कंट्रोल रूम बनाएगा। संचालन करने के लिए अलग से कंपनी रखी जाएगी। निदेशालय स्तर से पूरी मॉनीटरिंग होगी। पुरानी व्यवस्था के तहत प्रदेश में पांच कंपनियां जोनवार मोबाइल वेटरनरी यूनिट का संचालन करती हैं। सभी कंपनियों के अलग-अलग खुद के कंट्रोल रूम हैं। कॉल करने पर त्वरित सेवा नहीं मिलती है। लापरवाही की तमाम शिकायतें आती हैं। फिर भी विभाग को मनमानी रिपोर्ट सौंपते हैं।

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