अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस : लॉकडाउन ने खोली राह.... कविता बन गईं महिलाओं के लिए प्रेरणा

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Published By Monis Khan
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हल्द्वानी, अमृत विचार। कोविड-19 महामारी का लॉकडाउन जब चारों तरफ बंदी थी... लोग घरों में कैद होकर रह गए थे। इस दौर में आय ''डाउन'' हो गई और कारोबार में ''लॉक'' लग गए थे। आमजन के लिए आमदनी करना ही कोरोना वायरस से निपटने की तरह ही एक चुनौती थी। इस समय एक सामान्य गृहणी ने घर की बागडोर संभाली। 

एक हेल्पर के रूप में कोरोना राहत किट की पैकिंग से सफर शुरू किया और जो आज एक सफल कैंटीन संचालक तक पहुंच गया है। इसी के साथ ही एक सामान्य गृहणी कविता महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई।

नैनीताल रोड स्थित सिटी मजिस्ट्रेट/एसडीएम कार्यालय में महिलाओं का स्वयं सहायता समूह कैंटीन संचालित करता है। इसमें बाजार की अपेक्षा बेहद कम रेट में पौष्टिक व गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इस कैंटीन की संचालिका कविता चिलवाल है, स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष भी हैं। उनकी संघर्ष की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। कविता का विवाह वर्ष 2010 में महज 19 वर्ष की उम्र में हो गया था। शादी के बाद वह गृहिणी के रूप में परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही थीं। सब कुछ सामान्य चल रहा था लेकिन

वर्ष 2020-21 में कोविड-19 के लॉकडाउन ने पति हरेंद्र सिंह चिलवाल को कारोबार नहीं करने दिया। ऐसे में कविता ने पति हरेंद्र का साथ देने का निश्चय किया। उन्होंने सरस बाजार में स्वयं सहायता समूहों की ओर से कोरोना किट्स व दवाइयों की पैकिंग की। इस बीच वह स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं। उन्होंने सिलाई, कढ़ाई, ऐंपण, ब्यूटी पार्लर आदि की ट्रेनिंग ली। धीरे-धीरे इतनी कुशल हो गईं कि बाद में मास्टर ट्रेनर बन गई। फिर उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़ी और एसडीएम कोर्ट में कैंटीन संचालित कर रही हैं। वह पिछले तीन वर्षों से एसडीएम दफ्तर की प्रथम कैंटीन सफलतापूर्वक संचालित कर रही हैं। उनके इस संघर्ष में पति हरेंद्र, बेटा चेतन और बेटी बबली ने भी खूब सहयोग किया है।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उन पुरुषों का भी कर लें सम्मान,
जिनका कम नहीं होता स्वाभिमान,
फिर भी साल भर रखते हैं ध्यान,
कि बना रहे अपने समाज में
महिलाओं का मान-सम्मान।
-- बीना जोशी हर्षिता, हल्द्वानी

 

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