एआई से लेकर सूचना प्रौद्यौगिकी तक है संस्कृत प्रासंगिक, वैश्विक विदुषी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में संस्कृत विशेषज्ञों ने रखे विचार

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार: लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में विशेषज्ञों ने कहा कि संस्कृत भाषा धर्म और जाति से अलग भारत की सांस्कृतिक भाषा है। आज भी यह भाषा कंम्पयूटर से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस तक के लिए सर्वाधिक उपयुक्त भाषा है।

ग्लोबल संस्कृत फोरम एवं संस्कृत तथा प्राकृत भाषा विभाग के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित तृतीय वैश्विक विदुषी अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन के द्वितीय दिवस पर चार विशिष्ट व्याख्यान सत्रों का आयोजन किया गया। सत्र की अध्यक्षता आर्य कन्या पीजी कॉलेज, लखीमपुर खीरी की आचार्या प्रो. सुरचना त्रिवेदी ने की उपाध्यक्षता डॉ. दीप्ति विष्णु ने निभाई। नौ विदुषियों ने “शक्ति अपनी पूर्णकला में स्फुरित” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम में डॉ. अशोक कुमार शतपथी, डॉ. शोभाराम दुबे, डॉ. नमिता निगम, प्रो. वंदना द्विवेदी, प्रो. शालिनी साहनी ने शोध पत्रों का वाचन किया। मुख्य अतिथि ग्लोबल संस्कृत फोरम के अन्तर्राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो. कपिल मेहता (टेक्सास विश्वविद्यालय, अमेरिका) रहे।

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