लखनऊ : निकाली गई प्रतीकात्मक दांडी यात्रा, डॉ. सुधीर महादेव ने दिखाई हरी झंडी

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Published By Deepak Mishra
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लखनऊ। लखनऊ में महात्मा गांधी के ऐतिहासिक दांडी मार्च की स्मृति में गुरुवार को जन भवन से लखनऊ विश्वविद्यालय तक एक प्रतीकात्मक दांडी यात्रा निकाली गई। यह पदयात्रा राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। यात्रा को विशेष कार्याधिकारी (अपर मुख्य सचिव स्तर) डॉ. सुधीर महादेव बोबडे ने जन भवन से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 

पदयात्रा जन भवन परिसर से शुरू होकर लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय हाल में जाकर संपन्न हुई। यात्रा से पहले जन भवन परिसर में स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद पदयात्रा हजरतगंज चौराहा स्थित गांधी प्रतिमा, खादी आश्रम, परिवर्तन चौक और हनुमान सेतु होते हुए विश्वविद्यालय पहुंची। इस दौरान हजरतगंज और गांधी आश्रम में भी गांधी जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।

इस अवसर पर डॉ. सुधीर महादेव बोबडे ने कहा कि दांडी यात्रा केवल नमक कानून के विरोध का आंदोलन नहीं थी, बल्कि अन्याय के खिलाफ सत्य, साहस और जनशक्ति की अद्भुत अभिव्यक्ति थी। उन्होंने कहा कि गांधी जी के नेतृत्व में शुरू हुई इस ऐतिहासिक यात्रा ने पूरे देश में स्वतंत्रता की चेतना जगाई।

कार्यक्रम में विशेष कार्याधिकारी (शिक्षा) डॉ. पंकज एल. जानी ने कहा कि दांडी यात्रा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जो स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और संघर्ष की याद दिलाता है। उन्होंने बताया कि 6 अप्रैल 1930 को दांडी में महात्मा गांधी ने नमक कानून तोड़कर सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की थी।

विशेष कार्याधिकारी अशोक देसाई ने कहा कि दांडी मार्च सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों पर आधारित ऐतिहासिक आंदोलन था, जिसने विश्व समुदाय को यह संदेश दिया कि भारत का स्वतंत्रता संघर्ष अहिंसक और जनआधारित है। इस अवसर पर प्रो. अरविंद मोहन (प्रभारी कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय) ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गांधीजी का दांडी आंदोलन केवल नमक कानून के विरोध का प्रतीक नहीं था, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी था।

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