लखनऊ: पॉवर कार्पोरेशन की चूक उपभोक्ताओं पर पड़ी भारी, होती रही लाखों रुपये की वसूली
लखनऊ। मंगलवार को उत्तर प्रदेश पॉवर कार्पोरेशन के आईटी विंग से बड़ी खबर आई। इस खबर ने विभाग की नींद उड़ा दी। अधिकारियों ने इसे चूक मानते हुए मौके पर ही साफ्टवेयर में बदलाव कर उपभोक्ताओं को राहत दी। दरअसल गत 11 नवंबर को नियामक आयोग ने स्मार्ट मीटरों के एक से पांच किलोवाट के …
लखनऊ। मंगलवार को उत्तर प्रदेश पॉवर कार्पोरेशन के आईटी विंग से बड़ी खबर आई। इस खबर ने विभाग की नींद उड़ा दी। अधिकारियों ने इसे चूक मानते हुए मौके पर ही साफ्टवेयर में बदलाव कर उपभोक्ताओं को राहत दी। दरअसल गत 11 नवंबर को नियामक आयोग ने स्मार्ट मीटरों के एक से पांच किलोवाट के कनेक्शनों के आरसीडीसी शुल्क 600 को कम करते हुए 100 रुपये कर दिया। इस दौरान पांच किलोवाट से अधिक के लिए 200 रुपये आरसीडीसी निर्धारित की गई। लेकिन पॉवर कार्पोरेशन के आईटी विंग ने साफ्टवेयर में कोई बदलाव नहीं किया। जिससे 21 दिसंबर तक स्मार्ट मीटर के उपभोक्ताओं से आरसीडीसी के नाम पर 600 रुपये की वसूली होती रही।
इस दौरान विभाग ने हजारों स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं से लाखों रुपये की वसूली कर डाली। वहीं जब इस बात की जानकारी उपभोक्ता परिषद को हुई तो उसने विभाग के इस कारनामे को प्रबंधन के सामने रखा। इस दौरान प्रबंधन के अधिकारियों ने तो आरसीडीसी के नाम पर 600 रुपये की वसूली की बात से इंकार कर दिया। लेकिन जब सुबूत के तौर पर एक उपभोक्ता (जिसमे 21 दिसंबर तक आरसीडीसी 600 रुपये लिया गया) जमा आरसीडीसी को दिखाया गया। जिसके बाद विभाग के अधिकारियों ने अपनी गलती मानी और मंगलवार की देर शाम को साफ्टवेयर में बदलाव किया गया।
उपभोक्ता परिषद के मुताबिक विभाग ने एक महीने और 11 दिनों में हजारों उपभोक्ताओं से करोड़ों रुपये वसूल लिए। वहीं उपभोक्ता परिषद ने प्रबंधन से मांग की कि जिन उपभोक्ताओं से 600—600 रुपये आरसीडीसी के नाम पर लिए गए हैं, वे सभी रुपये उनके बिलों में समायोजित कर दिए जाएं। वहीं निदेशक वाणिज्य पॉवर कार्पोरेशन ने इसे विभाग की गलती मानते हुए वसूली गई रकम को बिलों में समायोजित करने के लिए आश्वस्त किया।
उ.प्र. राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा बड़े दुर्भाग्य की बात है कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन जिस स्मार्ट मीटर की वकालत करने में पुल बांध देता है उसे उपभोक्ताओं की कोई चिंता नहीं है। जब भी उपभोक्ताओं को लाभ देने बात सामने आती है पावर कार्पोरेशन प्रबंधन भूल जाता है।
