Bareilly: श्यामगंज की गल्ला मंडी को धूल के गुबार से मिलेगी मुक्ति

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। शहर की प्रमुख व्यावसायिक धड़कन कही जाने वाली श्यामगंज गल्ला मंडी के कारोबारियों को धूल के गुबार से निजात मिलने वाली है। पिछले दो महीनों से धूल और जानलेवा गड्ढों की मार झेल रहे व्यापारियों और राहगीरों की समस्या को ''अमृत विचार'' ने ''श्यामगंज मंडी : जहां होनी चाहिए रौनक, वहां धूल और गड्ढे'' शीर्षक के साथ प्रमुखता से उठाया तो अधिकारियों ने इसका संज्ञान लिया और सड़क निर्माण का कार्य शुरू करा दिया है। कारोबारियों की समस्या को समझते हुए सड़क का निर्माण रात में कराया जा रहा है। साहू गोपीनाथ कॉलेज से एसबीआई की श्यामगंज शाखा तक हाटमिक्स सड़क बनाने का काम पूरा कर लिया है।

सड़क की यह दुर्दशा बीते जनवरी माह में शुरू हुई थी, जब इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद नगर निगम के जलकल विभाग ने शहर की पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों को बदलने का निर्णय लिया था। इसी क्रम में साहू गोपीनाथ कॉलेज से फ्लाईओवर तक करीब 1200 मीटर नई पाइपलाइन बिछाई गई थी। जलकल विभाग ने पाइपलाइन डालने के 15 दिनों के भीतर सड़क को पूर्ववत करने का दावा किया था, लेकिन हकीकत में दो महीने बीत जाने के बाद भी सड़क को लावारिस छोड़ दिया गया। होली के प्रमुख त्योहार पर भी सड़क की बदहाली के कारण व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। 

गड्ढों और उड़ती धूल के कारण ग्राहक मंडी आने से कतराने लगे थे, जिससे इस प्रमुख कारोबारी केंद्र का टर्नओवर काफी गिर गया था। व्यापारियों का कहना था कि सड़क के ऊबड़-खाबड़ होने से आए दिन राहगीर चोटिल हो रहे थे। चूंकि पूरा शहर अनाज और किराने की जरूरतों के लिए इसी मंडी पर निर्भर है, इसलिए यहां की अव्यवस्था का असर पूरे शहर की सप्लाई चेन पर पड़ रहा था। अब निर्माण कार्य शुरू होने से दुकानदारों में उम्मीद जगी है कि धूल से होने वाली बीमारियों और दुर्घटनाओं से जल्द निजात मिल जाएगी। व्यापारियों ने ''अमृत विचार'' का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मीडिया के हस्तक्षेप के बाद ही सो रहे प्रशासन ने सुध ली है। उम्मीद है कि शेष बचे हिस्से का निर्माण भी जल्द ही गुणवत्ता के साथ पूरा कर लिया जाएगा।


व्यापारी अनिल तिवारी ने बताया कि होली का पूरा सीजन खराब हो गया। जलकल विभाग ने तो सड़क को नरक बना दिया। दिनभर धूल उड़ने से सांस लेना मुश्किल था। अब जब काम शुरू हुआ है, तो प्रशासन को इसकी गुणवत्ता भी देखनी चाहिए। ऐसा न हो कि पहली बारिश में ही सड़क फिर से उखड़ जाए और मुसीबत बढ़ जाए।

व्यापारी कुशाग्र अग्रवाल ने बताया कि दो महीने से हम लोग धूल फांक रहे थे और सामान गंदा हो रहा था। ग्राहक दुकान के बाहर गड्ढा देखकर ही लौट जाता था। अब कम से कम सड़क बननी शुरू हुई है, तो उम्मीद है कि कारोबार फिर से पटरी पर लौटेगा। रात में काम होना भी अच्छी बात है ताकि गल्ला मंडी का काम प्रभावित न हो।

व्यापारी प्रतुल अग्रवाल के मुताबिक साहू गोपीनाथ से सड़क बनना शुरू हो गई है, यह देखकर राहत मिली। पिछले दो महीने हमारे लिए किसी सजा से कम नहीं थे। गल्ला मंडी शहर की रीढ़ है, यहां सड़क खराब होने का मतलब है पूरे शहर की सप्लाई प्रभावित होना। हम चाहते हैं कि जल्द से सड़क निर्माण का काम पूरा हो।

नौकरीपेशा दीपक ने बताया कि मैं रोजाना इसी रास्ते से क्लिनिक जाता हूं। पिछले दो महीनों में मेरी बाइक के टायर और कमर दोनों जवाब दे गए थे। धूल के गुबार की वजह से आंखों में जलन और कपड़ों का बुरा हाल रहता था। अब सड़क पर डामर बिछता देखकर सुकून मिला है। अब गड्ढों से बचकर गाड़ी नहीं चलानी पड़ेगी।

 

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