UP News: लापरवाही के आरोपों में घिरे अस्पतालों पर विभाग की मेहरबानी, नोटिस देकर वैध करने की तैयारी

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Published By Muskan Dixit
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आव्या, ऑक्सीजन और कृष्णा लाइफ लाइन अस्पतालों की कमेटी ने की थी जांच

लखनऊ, अमृत विचार : मरीजों के इलाज में लापरवाही के आरोपों में घिरे कई निजी अस्पतालों पर कार्रवाई की बजाय विभाग मेहरबान है। जांच में दोषी मिले आव्या, ऑक्सीजन और कृष्णा लाइफ लाइन समेत कई अस्पतालों का संचालन किया जा है।

ठाकुरगंज स्थित ऑक्सीजन हॉस्पिटल में बच्चे की मौत के बाद समिति बनी थी। इस समिति ने जांच में अस्पताल को पहले दोषी ठहराया था। आरोप था कि बच्चे का इलाज विशेषज्ञ डॉक्टर की निगरानी में नहीं किया गया। हालांकि अस्पताल संचालक ने कमेटी की रिपोर्ट पर सवाल उठाए, जिसके बाद अधिकारियों ने पुरानी रिपोर्ट को बंद कर नए सिरे से जांच शुरू करा दी। नई जांच कमेटी में तीन सदस्यों को शामिल किया गया है और फिलहाल अस्पताल संचालक को नोटिस देकर बुलाया जा रहा है। आरोप है कि अस्पताल को राहत देने के लिए नई जांच का रास्ता अपनाया गया है।

तेलीबाग स्थित कृष्णा लाइफ लाइन हॉस्पिटल का लाइसेंस सीएमओ ने बीते वर्ष निरस्त कर दिया था। इसके बावजूद अस्पताल के संचालन की शिकायतें सामने आईं। शिकायतकर्ता सौरभ मिश्रा ने इस मामले की शिकायत की थी। सीएमओ कार्यालय की जांच में अस्पताल बंद होने का दावा किया गया, लेकिन 5 फरवरी 2026 को अपर निदेशक, लखनऊ मंडल के निरीक्षण में अस्पताल खुला मिला। निदेशक उपचार की जांच में यह भी सामने आया कि क्रमांक संख्या 1584 और पंजीकरण संख्या आरएमईई 2111475 दोनों एक ही अस्पताल से जुड़े हैं, जो नियमों के विपरीत है।

जांच में अवैध, फिर भी नोटिस का खेल

नर्सिंग होम के नोडल अधिकारी डॉ. एपी सिंह और चिकित्साधिकारी डॉ. संदीप सिंह ने पिछले माह दुबग्गा क्षेत्र के दस अस्पतालों में छापा मारा था। जांच के दौरान किसी भी अस्पताल में एमबीबीएस डॉक्टर नहीं मिले। इसके बावजूद विभाग की ओर से केवल नोटिस जारी कर कार्रवाई सीमित रखी गई। जांच में इंप्लस और मां वैष्णो हॉस्पिटल का पंजीकरण भी नहीं मिला था। विभाग ने इन पर जुर्माना लगाने की संस्तुति की थी, लेकिन बिना पंजीकरण के भी मां वैष्णो अस्पताल का संचालन जारी रहा। मामले में विवाद बढ़ने के बाद दोनों अस्पतालों को बंद करने के आदेश दिए गए थे। अब आरोप है कि अधिकारियों द्वारा इन अस्पतालों को नए सिरे से वैध करने की तैयारी की जा रही है। नर्सिंग होम के नोडल अधिकारी डॉ. एपी सिंह का कहना है कि संचालन पर रोक के बावजूद यदि अस्पताल का संचालन मिलता है तो कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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