Moradabad:मंडलायुक्त की ओर से कराई पैमाइश में भी प्रशासन के दावे की पुष्टि
मुरादाबाद, अमृत विचार। सदर तहसील के धीमरी गांव में सीएम कंपोजिट विद्यालय निर्माण की भूमि पर कब्जा हटवाने के दौरान महापौर के जमीन की बाउंड्री टूटने के मामले में नया मोड़ आने की संभावना है। महापौर ने स्थानीय अधिकारियों से लेकर शासन व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से भी शिकायत कर प्रशासन के कदम पर कड़ा ऐतराज जताया है।
पिछले दिनों धीमरी में कंपोजिट विद्यालय निर्माण को लेकर आवंटित भूमि पर कब्जा हटाने के लिए प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई हुई थी। इस दौरान महापौर की भूमि पर बनी बाउंड्री वाल को भी तोड़ दिया गया था। महापौर ने जिलाधिकारी और मंडलायुक्त तक से शिकायत की थी। प्रशासनिक अधिकारियों का दावा था कि भूमि की नाप-जोख कराने के बाद सरकारी भूमि पर किए गए कब्जे को हटाया गया था। वहीं, महापौर का दावा था कि उनकी निजी भूमि पर खड़ी बाउंड्री को भी तोड़ा गया। जबकि सरकारी भूमि से उनका कोई लेना देना नहीं था।
मंडलायुक्त के निर्देश पर डीएम अनुज सिंह ने अगले ही दिन राजस्व टीम को ले जाकर पैमाइश कराई थी। इस दौरान महापौर विनोद अग्रवाल भी मौजूद रहे। हालांकि बीच में महापौर ने उप जिलाधिकारी सदर व स्थानीय लेखपालों पर भी अविश्वास जताकर दूसरे जिले की टीम से पैमाइश कराने की मांग रखी थी। लेकिन जिला प्रशासन ने पैमाइश कराकर सत्यापन कार्य जारी रखा। अब पैमाइश पूरी हो गई है और इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है।
प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो पैमाइश पूरी होने पर कहानी कुछ और ही निकल कर सामने आ रही है। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पूर्व में सरकारी भूमि पर बाउंड्री किए जाने की दावे की पुष्टि हो रही है। डीएम अनुज सिंह ने बताया कि पैमाइश पूरी हो गई है। इसमें क्या निकला के सवाल पर उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा कि सच्चाई। अब इस रिपोर्ट के आधार पर अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हैं।
आखिर कैसे हुआ सरकारी भूमि पर कब्जा
सरकारी भूमि पर कब्जे को लेकर मुख्यमंत्री का रुख बेहद सख्त होने के बावजूद सरकारी भूमि पर कब्जा हो जाता है और प्रशासनिक अधिकारी, हल्का लेखपाल सहित अन्य कर्मचारियों को पता भी नहीं चलता। हालांकि, यह मामला महापौर की भूमि पर बनी बाउंड्री वाल गिराए जाने को लेकर चर्चा में आ गया, शहर में कई स्थानों पर सरकारी भूमि पर कब्जा कर बड़े-बड़े निर्माण किए चुके हैं।
