Uttrakhand: गैस सिलेंडर संकट...होटलों ने मेनू से हटाए डोसा और सांभर जैसे पकवान
नैनीताल, अमृत विचार। तला हुआ पराठा और डोसा जैसे कई व्यंजन होटलों की किचन से दूर हो चले हैं। कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी के कारण अनेक व्यंजन होटलों के मेनू से गायब हो चले हैं। सरोवर नगरी में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर सीमित संख्या में आपूर्ति होने तो लगी है।
नगर में 500 से अधिक होटल और गेस्ट हाउस हैं, जबकि रेस्टोरेंट की संख्या भी 150 से अधिक हैं। इधर कॉमर्शियल सिलेंडर आपूर्ति ठप होने से गैस पर निर्भर कई छोटे रेस्टोरेंट बंद हो चुके है।
होटलों की रसोई तंदूर और इंडक्शन पर सिमट रह गई है। जिसकी बड़ी मार साउथ इंडियन व्यंजनों पर पड़ी है। दरअसल, दक्षिण भारतीय अधिकांश व्यंजनों को अधिक आंच की जरूरत पड़ती है। जिस कारण नगर के अधिकांश छोटे बड़े होटलों ने डोसा और सांभर जैसे पकवान मेनू से हटा दिए हैं और तला हुआ पराठा और भटूरे जैसे व्यंजन भी हटा दिए हैं।
तंदूर के सहारे चल रही रसोई
नैनीताल: हैप्पी होम के जीएम आर एस नेगी ने बताया कि गैस की आंच पर पकाए जाने वाले व्यंजनों को मेनू से हटा दिया गया है। उनके होटल की रसोई तंदूर पर निर्भर होकर रह गई है। जब तक गैस सिलेंडर की समुचित आपूर्ति बहाल नहीं हो जाती, मेनू कम ही रहेगा।
चूल्हा बनाकर लकड़ी में खाना बनाने की तैयारी
नैनीताल: शेरवानी हिलटॉप इन के जीएम कमलेश सिंह ने बताया कि अधिक आँच में बनाए जाने वाले व्यंजनों को मेनू से हटा चुके हैं। उनका किचन इंडक्शन और तंदूर पर निर्भर हो चला है। साथ ही होटल परिसर में चूल्हे बनाकर लकड़ी में खाना बनाने की तैयारी भी कर रहे हैं।
