यूपी सरकार अपराध पर रोक लगाने के लिए बनाएगी पांच लैब्स, अपराध के बदलते तरीकों पर होगी रिसर्च....

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Published By Deepak Mishra
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने अपराध के बदलते तरीकों पर अंकुश लगाने के लिए 'यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज' (यूपीएसआईएफएस) में पांच नई प्रयोगशालाएं स्थापित करने का निर्णय लिया है। बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में यह जानकारी दी गयी। बयान के मुताबिक, प्रदेश सरकार की इस पहल के जरिये संस्थान के छात्र अपराध के विभिन्न स्वरूपों की जांच करने के तरीके सीख सकेंगे। 

बयान में बताया गया, प्रदेश सरकार 'इंस्टीट्यूट में क्वांटम कंप्यूटिंग लैब', 'चैलेंज्ड ऑडियो-वीडियो लैब', '3-डी प्रिंटिंग लैब', 'आईटी/ओटी सिक्योरिटी' के लिए एससीएडीए लैब और 'डिजिटल फॉरेंसिक लैब' शुरू करेगी। बयान के मुताबिक, इन लैब के शुरू होने से प्रदेश में अपराधों की जांच और साक्ष्य विश्लेषण की क्षमता में बड़ा सुधार होगा। 

वर्तमान में संस्थान में पांच प्रयोगशालाएं संचालित हैं, जिनमें 'एडवांस्ड साइबर फॉरेंसिक', 'एडवांस्ड डीएनए प्रोफाइलिंग', 'एआई-ड्रोन एंड रोबोटिक्स', 'डॉक्यूमेंटेशन एग्जामिनेशन एंड इंस्ट्रूमेंटेशन लैब्स' शामिल हैं। 'यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज' के निदेशक डॉक्टर जीके गोस्वामी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमेशा आधुनिक प्रौद्योगिकी अपनाने पर जोर देते हैं और इसी कड़ी में इंस्टीट्यूट में पांच नई प्रयोगशालाओं की स्थापना की तैयारी की जा रही है। 

उन्होंने बताया कि इसमें क्वांटम कंप्यूटिंग लैब के माध्यम से जटिल डाटा विश्लेषण और एन्क्रिप्शन से जुड़े मामलों को तेजी व सटीकता से सुलझाया जा सकेगा। गोस्वामी ने बताया कि यह लैब साइबर अपराधों की जांच में विशेष रूप से उपयोगी साबित होगी। उन्होंने बताया कि वहीं, चैलेंज्ड ऑडियो-वीडियो लैब उन मामलों में अहम भूमिका निभाएगी, जहां खराब गुणवत्ता वाले ऑडियो या वीडियो को स्पष्ट कर साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल करना होता है। 

अधिकारी ने बताया कि योगी सरकार प्रदेश में फॉरेंसिक ढांचा मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में न केवल नए फॉरेंसिक संस्थानों की स्थापना पर जोर दिया है बल्कि मौजूदा प्रयोगशालाओं को आधुनिक तकनीक से लैस करने का भी काम किया है। 

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