Uttrakhand: घने अंधेरे में भी ‘थर्मल ड्रोन’ की नजर से बच न सकेगा बाघ-तेंदुआ

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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अंकुर शर्मा, हल्द्वानी। अब रात का घना अंधेरा हो या गन्ने का खेत, बाघ-तेंदुआ थर्मल ड्रोन की तीसरी आंख से बच नहीं सकेगा। जंगलात ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए नई टेक्नोलॉजी का सहारा लिया है। वन विभाग का दावा है कि इस ड्रोन के आने के बाद बाघ, तेंदुए को रेस्क्यू में मदद मिलेगी।

तराई पूर्वी वन डिवीजन के जंगल 82489 हेक्टेयर में नैनीताल, ऊधम सिंह नगर, चम्पावत जिलों में नेपाल और उत्तर प्रदेश बॉर्डर तक फैले हुए हैं। इस वन डिवीजन से सटा हुआ नंधौर वन्यजीव अभ्यारण्य व पीलीभीत टाइगर रिजर्व हैं जहां बाघ-तेंदुए की खासी तादाद है।

वहीं, तराई में गन्ने की हजारों बड़ी-छोटी जोत हैं। वन अधिकारियों का कहना है कि अमूमन देखा जाता है कि तराई में जब बाघ-तेंदुआ और मानव संघर्ष होता है तो ये वन्यजीव गन्ने के खेत या भीषण जंगल में छिप जाते हैं। ऐसे में इनको ढूंढना बहुत मुश्किल होता है।

ड्रोन से भी इनकी लोकेशन ट्रेस नहीं हो पाती है, खासकर गन्ने के खेतों में दिक्कतें होती हैं। इसी को देखते हुए थर्मल ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा। इस थर्मल ड्रोन की मदद से गन्ने के खेत, अंधेरे में कहीं से भी बाघ-तेंदुए की लोकेशन ट्रेस कर रेस्क्यू करना आसान हो जाएगा।

शरीर के तापमान से ढूंढता है लोकेशन
वन अधिकारियों के अनुसार, थर्मल ड्रोन एक आम ड्रोन की तरह लाइव प्रसारण तो दिखाता ही है, इसी के साथ ही यह खूबी है कि इस ड्रोन में लगे सेंसर्स वन्यजीवों के शरीर के तापमान से उसकी लोकेशन ट्रेस कर सकते हैं। बस, बाघ-तेंदुए या अन्य वन्यजीवों के तापमान को इस ड्रोन में फीड करना होता है, फिर ड्रोन स्वयं ही वन्यजीव को ढूंढ लेगा। इससे वन टीम को वन्यजीव को रेस्क्यू करना आसान होगा। वर्तमान में प्रयोग के तौर पर एक थर्मल ड्रोन मंगाया जा रहा है, प्रयोग सफल होने पर रेंज वार ड्रोन मंगाए जाएंगे।

कर्मियों को दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण
हल्द्वानी : डीएफओ बागरी ने बताया कि थर्मल ड्रोन चलाने के लिए समूची वन डिवीजन से तकनीकी एक्सपर्ट कर्मी चिन्हित किए जाएंगे। फिर एक स्पेशल टीम बनाई जाएगी जिसे थर्मल ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि किसी भी मानव वन्यजीव संघर्ष पर यह टीम तुरंत रिस्पांड कर सकें।

वर्तमान में हैं पांच ड्रोन
तराई पूर्वी वन डिवीजन में नौ रेंज हैं। वर्तमान में वन डिवीजन में पांच ड्रोन हैं जिनसे अवैध खनन, पातन व शिकार के लिए निगरानी की जाती है। ये ड्रोन मानव-वन्यजीव संघर्ष के लिहाज से संवदेनशील रेंजों व स्थानों को दिए गए हैं। जब थर्मल ड्रोन आ जाएगा तो हेड क्वार्टर पर मौजूद रहेगा, जो मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटना पर तत्काल भेजा जाएगा।

डीएफओ तराई पूर्वी वन डिवीजन हल्द्वानी हिमांशु बागरी ने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए थर्मल ड्रोन मंगाया जा रहा है। इस ड्रोन की खूबी यह है कि यह शरीर के तापमान से किसी भी वन्यजीव की लोकेशन ट्रेस करने एवं रेस्क्यू में मदद मिलेगी। इससे बाघ-तेंदुए को रेस्क्यू में बहुत मदद मिलेगी।

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