बरेली : जमीन की खातिर पिता की हत्या में उम्रकैद, 1 लाख जुर्माना
अपर सत्र न्यायाधीश तबरेज अहमद की काेर्ट ने सुनायी सजा
विधि संवाददाता बरेली, अमृत विचार। जमीन न देने से नाराज होकर एक वर्ष पूर्व पिता की हंसिया मारकर हत्या करने के मामले में थाना नवाबगंज के ग्राम इनायतपुर निवासी छत्रपाल मौर्य को परीक्षण में दोषी पाते हुए अपर सत्र न्यायाधीश तबरेज अहमद ने सश्रम आजीवन कारावास और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी। जुर्माना मुल्जिम की मां को बतौर मुआवजा मिलेगा।
सरकारी वकील दिगम्बर पटेल व मनोज वाजपेई ने बताया कि वादी मुकदमा ताराचन्द्र ने थाना नवाबगंज में तहरीर देकर बताया था कि वह गांव इनायतपुर का रहने वाला है। 11 अप्रैल 2025 की शाम 6 बजे उसका बड़ा भाई छत्रपाल खेत से शराब पीकर घर आया, जिससे उसके पिता लालाराम व भाई छत्रपाल में विवाद हो गया। नशे की हालत में छत्रपाल ने अपने हाथ में लिया हंसिया चला दिया जिससे उसके पिता लालाराम (65) की गर्दन के बाई तरफ चोट आई और इलाज के लिए ले जाते वक्त पिता की मृत्यु हो गयी। अभियोजन ने 7 गवाह पेश किये।
मुल्जिम की मां बोली- उसके सामने ही पति को मार दिया
दोषी छत्रपाल की मां रामदेई ने अदालत में गवाही में बताया कि घटना बीते वर्ष चैत्र मास में होली के बाद की है, शाम पांच-छह बजे की बात है, वह आंगन में बैठकर बंदगोभी की सब्जी काट रही थी, तभी छत्रपाल आ गया। उसके हाथ में हंसिया मारा। वह चीखी चिल्लाई और पति को बचाने के लिए आवाज लगायी। पति ने उसे तो बचा लिया, लेकिन छत्रपाल ने वही हंसिया उसके सामने पति की गर्दन पर मार दिया, जिससे वह घायल होकर वहीं गिर पड़े। उससे बोले बरखेड़ा वाली अब हम नहीं बचेंगे।
मुल्जिम छत्रपाल के छोटे भाई की बहू महेश्वरी ने अपने बयान में बताया कि उसके पति चार भाई हैं। ससुर के नाम दस बीघा जमीन थी। वह उस पर स्वयं खेती करते थे। उसके जेठ छत्रपाल अपने हिस्से की जमीन को लेकर अक्सर ससुर से विवाद करते थे। 11 अप्रैल 2025 को उसके जेठ बाहर से आये और उसकी सास से कहने लगे जमीन उसके नाम नहीं करायी, इसलिए उसकी बीबी उसे छोड़कर चली जाती है। सास ने कहा कि सब कमाकर खाते है, तुम भी स्वयं कमाकर खाओ। तभी छत्रपाल ने उसकी सास से हंसिया छीनकर हाथ में मार दिया। फुंकनी उठायी और सास के सिर में मार दी। तभी ससुर आ गये बीच-बचाव करने की कोशिश की तो छत्रपाल ने हंसिया उसके ससुर की गर्दन में मार दिया जिससे ससुर वहीं गिर पड़े।
