नए युवा और बदलती करियर संभावनाएं

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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आज का समय अवसरों, संभावनाओं और प्रतिस्पर्धा का समय है। बदलती तकनीक, वैश्वीकरण और नई आर्थिक संरचनाओं ने करियर के पारंपरिक ढांचे को पूरी तरह परिवर्तित कर दिया है। एक समय था जब डॉक्टर, इंजीनियर या सरकारी नौकरी को ही सफलता का पर्याय माना जाता था, लेकिन आज डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल मीडिया, डिजाइन, खेल, उद्यमिता और अनेक कौशल आधारित क्षेत्रों में भी उज्ज्वल भविष्य के द्वार खुले हैं। यह विविधता जहां एक ओर युवाओं को नए अवसर प्रदान करती है, वहीं दूसरी ओर उनके सामने सही चुनाव की चुनौती भी खड़ी करती है

रोजगार योग्य कौशल  

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भारत का वर्तमान जनसांख्यिकीय परिदृश्य इस चर्चा को और अधिक महत्वपूर्ण बना देता है। देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है और हर वर्ष लगभग 1.2 करोड़ युवा कार्यबल में प्रवेश करते हैं। यह स्थिति भारत को एक बड़ी संभावित शक्ति प्रदान करती है, जिसे “डेमोग्राफिक डिविडेंड” कहा जाता है। किन्तु यदि इस युवा शक्ति को उचित दिशा, कौशल और अवसर नहीं मिले, तो यही संभावना एक चुनौती में परिवर्तित हो सकती है। यही वह बिंदु है, जहां कैरियर चयन और कौशल विकास के बीच का संबंध अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। विभिन्न रिपोर्ट्स यह संकेत करती हैं कि देश में रोजगार की समस्या से अधिक “रोजगार योग्य कौशल” की कमी एक बड़ी चुनौती है। आज भी लगभग आधे युवा ऐसे हैं, जो उद्योग की अपेक्षाओं के अनुरूप पूरी तरह तैयार नहीं हैं। कई अध्ययन बताते हैं कि केवल लगभग 50 प्रतिशत ग्रेजुएट ही वास्तव में जॉब-रेडी माने जाते हैं। इसका अर्थ यह है कि शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए आवश्यक व्यावहारिक दक्षताओं से वंचित रह जाते हैं।यह स्थिति शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ती खाई को भी उजागर करती है। 

युवाओं के लिए अवसर और चुनौती

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देश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, फिर भी बेरोजगारी के आंकड़ों में बड़ी हिस्सेदारी शिक्षित युवाओं की ही दिखाई देती है। लगभग 65 से 67 प्रतिशत बेरोजगार युवाओं का ग्रेजुएट होना इस तथ्य को स्पष्ट करता है कि केवल डिग्री हासिल करना सफलता की गारंटी नहीं है। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली अभी भी अधिकतर सैद्धांतिक ज्ञान पर आधारित है, जबकि उद्योग और समाज को व्यावहारिक कौशल, नवाचार और समस्या समाधान की क्षमता रखने वाले युवाओं की आवश्यकता है। कौशल अंतर या “स्किल गैप” भी इस समस्या का एक महत्वपूर्ण पक्ष है। देश में औपचारिक रूप से प्रशिक्षित युवाओं का प्रतिशत अभी भी बहुत कम है, जो लगभग 4 से 5 प्रतिशत के आसपास माना जाता है। वहीं, नई तकनीकी क्षेत्रों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस और डिजिटल तकनीक में कुशल युवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन उस अनुपात में प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध नहीं है। यह अंतर युवाओं के लिए अवसर भी है और चुनौती भी, क्योंकि जो इस दिशा में स्वयं को तैयार करेगा, वही भविष्य में आगे बढ़ेगा।

रोजगार की गुणवत्ता

रोजगार की गुणवत्ता भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनकर उभर रही है। बड़ी संख्या में युवा अपनी योग्यता से कम स्तर के कार्य करने के लिए मजबूर हैं, जिससे उनमें असंतोष और अस्थिरता की भावना बढ़ती है। यह स्थिति केवल आर्थिक नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक स्तर पर भी प्रभाव डालती है। इन सभी तथ्यों और आंकड़ों के बीच सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि विद्यार्थी अपने कैरियर का चुनाव किस प्रकार करें। इसका उत्तर आत्म पहचान में निहित है। प्रत्येक विद्यार्थी की अपनी रुचियां, क्षमताएं और सपने होते हैं। जब कोई व्यक्ति अपनी रुचि के अनुरूप क्षेत्र का चयन करता है, तो वह उसमें अधिक समय तक टिकता है, बेहतर प्रदर्शन करता है और अंततः संतुष्टि भी प्राप्त करता है। इसके विपरीत, यदि कैरियर का चुनाव केवल सामाजिक दबाव, तुलना या अधूरी जानकारी के आधार पर किया जाता है, तो वह आगे चलकर असंतोष का कारण बनता है। सही निर्णय के लिए आवश्यक है कि विद्यार्थी अपने भीतर झांकें, अपनी रुचियों और क्षमताओं को समझें और विभिन्न कैरियर विकल्पों के बारे में ठोस जानकारी प्राप्त करें। 

रुचि, क्षमता और लक्ष्य

आज सूचना के अनेक स्रोत उपलब्ध हैं, लेकिन सही और प्रामाणिक जानकारी का चयन करना भी उतना ही आवश्यक है। इसके साथ ही शिक्षकों, अभिभावकों और कैरियर विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेना निर्णय को अधिक सुदृढ़ बनाता है। इस प्रक्रिया में परिवार और विद्यालय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों पर अपने सपनों का बोझ न डालें, बल्कि उनकी रुचियों और क्षमताओं को समझते हुए, उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। वहीं शिक्षकों का दायित्व केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि वे विद्यार्थियों के मार्गदर्शक बनकर उन्हें जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए तैयार करते हैं। एक सकारात्मक और सहयोगात्मक वातावरण बच्चों में आत्मविश्वास विकसित करता है और उन्हें सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। आज का समय निरंतर सीखने का समय है।

कैरियर अब एक स्थिर विकल्प नहीं, बल्कि एक गतिशील यात्रा बन चुका है, जिसमें समय-समय पर नए कौशल सीखना, स्वयं को अपडेट करना और बदलती परिस्थितियों के अनुसार ढलना आवश्यक है। यही लचीलापन और सीखने की प्रवृत्ति व्यक्ति को दीर्घकालिक सफलता की ओर ले जाती है। अंततः यह स्पष्ट है कि कैरियर का सही चुनाव केवल एक निर्णय नहीं, बल्कि जीवन की दिशा तय करने वाली प्रक्रिया है।

यह प्रक्रिया तभी सफल हो सकती है जब उसमें आत्मविश्वास, सही जानकारी, कौशल विकास और स्पष्ट लक्ष्य का समन्वय हो। आज के विद्यार्थी यदि इन आधारों को समझकर अपने कैरियर की दिशा तय करते हैं, तो वे न केवल अपने लिए एक सफल भविष्य का निर्माण करेंगे, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे। याद रखना होगा कि कैरियर का चुनाव भीड़ का अनुसरण नहीं, बल्कि अपनी पहचान को समझते हुए अपनी राह बनाने की प्रक्रिया है। सही कैरियर वही है, जहां रुचि, क्षमता और लक्ष्य एक साथ मिलकर जीवन को सार्थकता प्रदान करते हैं।

भूषण कुमार और विवेक अग्निहोत्री ने अपनी नयी फिल्म 'ऑपरेशन सिंदूर' की घोषणा की मुंबई, 26 मार्च (भाषा) भूषण कुमार और विवेक रंजन अग्निहोत्री ने बृहस्पतिवार को अपनी नयी फिल्म 'ऑपरेशन सिंदूर' की घोषणा की। कुमार और अग्निहोत्री के अनुसार, यह फिल्म पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकी बुनियादी ढांचे पर भारत के लक्षित सैन्य हमलों के 'कोडनेम' से प्रेरित है।

यह फिल्म लेफ्टिनेंट जनरल के.जे.एस. 'टाइनी' ढिल्लों (सेवानिवृत्त) की पुस्तक 'ऑपरेशन सिंदूर: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ इंडियाज डीप स्ट्राइक्स इनसाइड पाकिस्तान' पर आधारित होगी। इस फिल्म का निर्देशन अग्निहोत्री करेंगे व निर्माण कुमार की टी-सीरीज और निर्देशक की 'आई एम बुद्धा प्रोडक्शंस' द्वारा किया जाएगा। वर्ष 2025 में जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 लोग मारे गए थे जिनमें अधिकतर पर्यटक थे।

कुमार ने एक बयान में कहा, ''कुछ कहानियां चुनी नहीं जातीं, वे आपको चुनती हैं। 'ऑपरेशन सिंदूर' ऐसी ही एक कहानी है। जिसे ईमानदारी, साहस और जिम्मेदारी के साथ बताया जाना जरूरी है। जब कोई राष्ट्र इतने बड़े स्तर की घटनाओं से गुजरता है, तो उनका सच्चाई से दस्तावेजीकरण करना महत्वपूर्ण हो जाता है।'' निर्माता-निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री ने यह भी कहा, ''यह सिर्फ एक फिल्म नहीं है। यह एक रहस्योद्घाटन है।

ऑपरेशन सिंदूर' के जरिए भारत ने न केवल पहलगाम आतंकी हमले का बदला लिया है और पाकिस्तान को दंडित किया है, बल्कि आधुनिक युद्ध में अपनी शक्ति का प्रदर्शन भी किया है।'' 'द कश्मीर फाइल्स', 'द ताशकंद फाइल्स' और 'द बंगाल फाइल्स' जैसी फिल्मों के लिए मशहूर निर्देशक-निर्माता विवेक रंजन अग्निहोत्री ने कहा कि उन्होंने हमेशा ऐसी कहानियां सुनाने में विश्वास किया है जो असहज करने वाली तो होती हैं लेकिन उन्हें कहना जरूरी होता है। उन्होंने कहा, ''मेरा प्रयास साहस, व्यावसायिकता और रणनीतिक स्पष्टता की इस कहानी को प्रमाणिकता के साथ दर्शकों के सामने लाने का है साथ ही इसे एक रोमांचक सिनेमाई अनुभव के रूप में पेश करना भी है।'' फिल्म के बारे में अन्य विवरण जल्द साझा किए जाएंगे। 

।-संध्या राजपुरोहित, शिक्षिका

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