कानपुर : फर्जी डिग्रियां व मार्कशीट सिंडिकेट का एक और आरोपी चढ़ा पुलिस के हत्थे
कानपुर, अमृत विचार। नौ राज्यों के 14 विश्वविद्यालय की फर्जी मार्कशीट व डिग्री बनाने के मामले में एसआईटी ने सिंडिकेट से जुड़े एक और बिचौलिए को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। पुलिस ने आरोपी को नौबस्ता एलिवेटेड हाईवे से दबोचा। पकड़ा गया आरोपी चमनगंज का रहने वाला है, जो अलीगढ़ के जामिया उर्दू कालेज से 10वीं व 12वीं की मार्कशीट बनवाता था। पूछताछ में उसने कालेज से जुड़े एक और संविदाकर्मी शोएब का भी नाम बताया, जिसकी तलाश की जा रही है।
एसआईटी टीम का कहना है कि अलीगढ़ का संविदाकर्मी आरोपी के पकड़े जाने के बाद कालेज स्टाफ की भूमिका का पता चलेगा। किदवईनगर पुलिस ने 18 फरवरी को जूही गौशाला स्थित शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के कार्यालय में छापा मारकर फर्जी डिग्रियां व डिपलोमा बांटने के फर्जीवाड़े का भंड़ाफोड़ किया था। मौके से पुलिस ने नौ राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों, यूपी माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज और अलीगढ़ के जामिया उर्दू कालेज की एक हजार से ज्यादा मार्कशीट व डिग्री बरामद की थीं।
जिसमें बीटेक, एमटेक, बीफार्मा, डीफार्मा, एलएलबी आदि की डिग्री के साथ हाईस्कूल व इंटर की मार्कशीट भी शामिल थीं। पुलिस ने चार आरोपियों गिरोह का सरगना शैलेंद्र कुमार ओझा, नागेश मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र, अश्वनी कुमार सिंह को पहले जेल भेजा। फिर नोएडा का विनीत को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
इन सबकी गिरफ्तारी के बाद आरोपियों से पूछताछ में चमनगंज निवासी शेखू उर्फ मो. अजहरूद्दीन खान का नाम सामने आया था, जो सरगना शैलेंद्र के लिए बिचौलिए का काम करता था। उसकी तलाश में लगी एसआईटी टीम को शुक्रवार उसके शहर छोड़ने की जानकारी मिली। इस पर टीम उसके पीछे लगी और सर्विलांस टीम की मदद से लोकेशन के आधार पर उसे नौबस्ता एलिवेटेड हाईवे से गिरफ्तार कर लिया।
एसआईटी प्रभारी व एडीसीपी साउथ योगेश कुमार ने बताया कि पूछताछ में आरोपी ने शैलेंद्र के लिए काम करने की बात कबूल की है। उसने बताया कि इलाके के ताबिश नामक युवक की मार्कशीट बनवाने के दौरान संपर्क में आया था। फिर उसके लिए काम करने लगा। वह 10वीं व 12वीं की मार्कशीट बनवाता था। जिसके बदले में उसे 12 हजार रुपये मिलते थे। वह अलीगढ़ निवासी शोएब को 10 हजार रुपये देकर मार्कशीट बनवाकर शैलेंद्र को उपलब्ध करवाता था।
इसके अलावा आरोवी के भोपाल की सर्वपल्ली राधाकृष्णन विश्वविद्यालय से भी जुड़े होने की जानकारी मिली है। हालांकि छापेमारी के दौरान वहां की कोई भी मार्कशीट व डिग्री नहीं मिली थी। इसके बावजूद विश्वविद्यालय से संपर्क करके उसकी भूमिका के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। वहीं, शोएब की तलाश में टीमें लगाई गई है, जिसके पकड़े जाने के बाद कालेज स्टाफ की भूमिका के बारे में भी स्पष्ट जानकारी हो सकेगी।
सीएसजेएमयू की सिर्फ दो डिग्रियां मिलीं फर्जी
एसआईटी प्रभारी योगेश कुमार ने बताया कि छापेमारी के दौरान छत्रपति शाहूजी महाराज विवि की 371 डिग्रियां मिली थी। उनके सत्यापन में 369 डिग्रियां सही पाई गई हैं, जबकि दो डिग्री फर्जी मिलीं। इनमें एक बीए की है। फर्जी डिग्री के बारे में और जानकारी जुटाई जा रही है। रिमांड पर आरोपियों को लेने के बाद फर्जी डिग्रियों के बारे में पूछताछ की जाएगी।
