Moradabad: साख पर हमला था मैनाठेर कांड, फिर भी दबाव में रही थी पुलिस
मुरादाबाद, अमृत विचार। मैनाठेर में बवाल में हजारों की भीड़ की ओर से किए बवाल, लूट, आगजनी और डीआइजी पर जानलेवा हमले के बावजूद पुलिस पूरी तरह से दबाव में रही थी। पुलिस ने 300 50 से अधिक को नामजद करते हुए तीन सौ से अधिक अज्ञात लोगों के विरुद्ध पांच मुकदमे लिखे थे। एक महीने से अधिक समय तक पुलिस भीड़ द्वारा लूटी गई डीआईजी की पिस्टल बरामद नहीं कर पाई थी।
सपा के नेता जो उस समय बसपा में थे ने संभल के एक कद्दावर ने डीआईजी की लूटी गई पिस्टल को वापस दिलवाने के लिए पुलिस ने एक सपाई समेत 25 लोगों के नाम निकालने में भूमिका निभाई थी जिसके आधार पर तत्कालीन पुलिस अधिकारियों ने दबाव में समझौता किया था। 2012 में सपा सरकार ने दबाव में सपा नेता समेत 25 लोगों के नाम निकाले गए। वहीं, पांच में चार मुकदमों में एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगा दी गई। 177/ 11 मुकदमा अपराध संख्या में 25 लोगों के खिलाफ दाखिल चार्जशीट पर 16 दोषियों को सजा सुनाई गई है। अब तक विवेचकों ने घटना में से निकाले गए नामों को दोबारा विवेचना में शामिल करने की कोशिश भी नहीं की।
एडीजे दो की अदालत के लोक अभियोजक ब्रजराज सिंह ने बताया कि उस वक्त दंगा करने वाले सभी लोग दंगाई नहीं थे। जांच में बाद में पता चला की लोग समझाने और रोकने का काम कर रहे थे। जिनका नाम दंगा करने वाले दोषियों के मुकदमे से निकाला गया था। पुलिस की ओर से साक्ष्य संग्रहित करते वक्त लगा और बाद में सही आरोपियों को सजा मिली है। उन्होंने बताया कि उस समय दंगाइयों ने डीएम की गाड़ी पर भी पथराव कर दिया था। जिससे डीएम को भागना पड़ा।
भीड़ को दोबारा उकसाने वाले सपाई को नहीं मिली सजा
भीड़ उकसाने वाले मुख्य आराेपी गांव का तत्कालनीन प्रधान कामिल की मुकदमे के फैसले से दो महीने पहले ही मौत हो गई थी। उसने सुबह- शाम तक आसपास के गांव के लोगों को कुरान की बेहुरमती करने अफवाह उड़ाकर लोगों को बरगलाया था। वहीं, सपा के कद्दावर नेता की भी भीड़ का उकसाने में महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। जिसके बाद बेकाबू हुई भीड़ ने जमकर बवाल काटा था। सपा सपा सरकार आते ही वह अपना नाम निकलवाने में कामयाब रहा।
