यूपी सरकार की नई पहल : ‘द शैडो’ एप से बेटियों की सुरक्षा को टेक्नोलॉजी का कवच

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Published By Virendra Pandey
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लखनऊ, अमृत विचार : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप बेटियों की सुरक्षा को तकनीकी मजबूती देने की दिशा में एक नई पहल की गई है। यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज (यूपीएसआईएफएस) द्वारा विकसित “द शैडो” एप अब छात्राओं के लिए “डिजिटल परछाईं” की तरह काम करेगा। यह एप न केवल सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी और प्रबंधन को भी एक ही प्लेटफॉर्म पर लाएगा।

संस्थान के डिप्टी डायरेक्टर चिरंजीव मुखर्जी के अनुसार, यह एप बीटेक छात्रों द्वारा विकसित किया गया है और इसका उद्देश्य छात्राओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पारदर्शी व जवाबदेह प्रणाली तैयार करना है। एप के माध्यम से कैंपस में प्रवेश-निकास, अवकाश अनुरोध और अन्य गतिविधियों की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी। इसकी सबसे अहम विशेषता ‘पैरेंट-फर्स्ट अप्रूवल सिस्टम’ है, जिसमें छात्रा के कैंपस से बाहर जाने से पहले अभिभावकों की अनुमति अनिवार्य होगी। इससे सुरक्षा के साथ अभिभावकों का विश्वास भी मजबूत होगा।

इसके अलावा एप में इंटीग्रेटेड एसओएस इमरजेंसी फीचर दिया गया है, जिससे किसी भी खतरे की स्थिति में एक क्लिक पर संस्थान प्रशासन और परिजनों को तत्काल अलर्ट मिल जाएगा। क्यूआर-कोड आधारित डिजिटल गेट पास सिस्टम कैंपस में अनधिकृत प्रवेश पर भी प्रभावी नियंत्रण रखेगा। डॉ. नेहा सिंह के मार्गदर्शन में छात्र हर्ष और आदित्य मिश्रा द्वारा विकसित यह एप तकनीकी नवाचार का उदाहरण है, जो बेटियों की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को नई दिशा देता है।

‘द शैडो’ एप की खासियतें
• पैरेंट-फर्स्ट अप्रूवल से बाहर जाने की अनुमति

• SOS इमरजेंसी अलर्ट से त्वरित सहायता

• रियल टाइम एंट्री-एग्जिट ट्रैकिंग

• क्यूआर कोड आधारित डिजिटल गेट पास

• पढ़ाई, अटेंडेंस और प्रदर्शन की मॉनिटरिंग

क्यों खास है यह पहल

• छात्राओं की सुरक्षा और स्वतंत्रता में संतुलन

• अभिभावक, शिक्षक और संस्थान एक प्लेटफॉर्म पर

• तकनीक आधारित पारदर्शी निगरानी प्रणाली

• बेटियों के लिए “डिजिटल सुरक्षा कवच”

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