Hanuman Jayanti: साल में दो बार हनुमान जयंती मनाने की परंपरा, रामनगरी में विधि विधान से धार्मिक अनुष्ठान और उत्सव

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Published By Anjali Singh
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सत्य प्रकाश/ अयोध्या,अमृत विचार : रामनगरी में बजरंगबली की दो बार जयंती मनाई जाती है। मंदिरों में विधि विधान से धार्मिक अनुष्ठान और उत्सव का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष 2 अप्रैल चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को पहली जयंती पड़ रही है। वहीं दूसरी बार कार्तिक मास के नरक चतुर्दशी यानि छोटी दीपावली को भी हनुमान जयंती मनाए जाने की परंपरा है, जिसमें हनुमान गढ़ी समेत धाम के सभी मंदिरों में उत्सव होते हैं।

अयोध्या में भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के बाद चैत्र शुक्ल पूर्णिमा पर राम मंदिर में भी पहली बार भव्य श्री हनुमान जयंती के आयोजन की तैयारी है। इसके अलावा हनुमान गढ़ी में भी दिव्य झांकी सजाई जाएगी। वहीं सरयू तट स्थित प्राचीन काले राम मंदिर में विराजमान दक्षिण मुखी हनुमान जिनके जन्म जयंती का आयोजन भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा। जहां ब्रह्म मुहूर्त से ही धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन संपन्न होगा। 

मंदिर के पुजारी गोपाल देश पाण्डेय ने बताया कि चैत्र शुक्ल पूर्णिमा पर हनुमान जयंती दक्षिण भारत में विशेष महत्व होता है। देश में अलग-अलग तिथियों पर हनुमान जी की जयंती मनाई जाती है, जिसमे उत्तर भारत में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के मध्य रात्रि में मनाई जाती है तो वहीं दक्षिण भारत में चैत्र कृष्ण पूर्णिमा के सूर्योदय के समय हनुमान जन्मोत्सव मनाने की परंपरा है। 

2 अप्रैल को सूर्योदय के समय मंदिर में स्थित दक्षिण मुखी हनुमान जी का अभिषेक आरती का आयोजन किया जाएगा। जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हनुमान कथा भी संपन्न होगी। उन्होंने बताया कि दक्षिण मुखी हनुमान जी का दर्शन बहुत ही दुर्लभ है।

कालेराम में स्थित हनुमान जी की मूर्ति देवी स्वरूप है जब पाताल में जाकर अहिरावण का वध किया था तो उन्होंने देवी रूप धारण किया था और बाएं पैर के नीचे अहिरावण हैं क्योकि बाएं पैर से ही वध किया था उसी रूप में इस स्थान पर भगवान हनुमान का दर्शन होता है।

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