Lucknow News: भगत सिंह के शहादत दिवस की पूर्व संध्या पर हुई फिल्म इंकलाब की स्क्रीनिंग
लखनऊ, अमृत विचार: आजादी के नायकों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत दिवस की पूर्व-संध्या पर जगत नारायण रोड स्थित एसबीएम लाइब्रेरी में गौहर रज़ा द्वारा निर्देशित डॉक्युमेंट्री फिल्म इंकलाब दिखायी गई। जन संस्कृति मंच की ओर से आयोजित इस स्क्रीनिंग के दौरान दर्शक भगत सिंह और उनके साथियों की क्रांतिकारी राजनीति, आजाद भारत के लिए उनके समाजवादी स्वप्न और देश के लिए हंसते-हंसते मर-मिटने के संकल्प से रूबरू हुए।
यह भी कैसा संयोग है कि पंजाबी भाषा के क्रांतिकारी कवि पाश की शहादत भी 23 मार्च को हुई। उन्होंने धर्म के आधार पर अलग खालिस्तान का विरोध करते हुए शहादत दी। ऐसे महान कवि को उनकी कविता सबसे खतरनाक होता है सपनों का मर जाना… के पाठ के साथ उन्हें याद किया गया। साथ ही ईरान पर साम्राज्यवादी हमले की निंदा की गई।
स्क्रीनिंग के बाद फिल्म और इस बहाने देश-दुनिया के मौजूदा निजाम पर एक चर्चा भी हुई। जसम उत्तर प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष कौशल किशोर ने कहा कि भगत सिंह सिर्फ आजादी नहीं बल्कि ऐसा भारत चाहते थे जहां बराबरी हो, जाति-धर्म के आधार पर कोई भेदभाव न हो, मनुष्य के द्वारा मनुष्य का शोषण न हो। भगत सिंह ने जिन दो नारों- इंकलाब जिंदाबाद, साम्राज्यवाद मुर्दाबाद को जन-जन तक पहुंचाया वे आज भी प्रासंगिक बने हुए हैं।
जसम लखनऊ के सचिव फरजाना महदी ने कहा कि भगत सिंह की विरासत वामपंथी विरासत है, क्रांतिकारी विरासत है। दक्षिणपंथी उन्हें सिर्फ एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में पेश करते हैं, उनके विचारों और उनके सपनों के भारत की बात नहीं करते। जसम के ही सत्य प्रकाश चौधरी ने कहा कि भगत सिंह एक घोषित नास्तिक थे। उनका लेख मैं नास्तिक क्यों हूं आज भी सर्वाधिक पढ़े जाने वाले लेखों में से एक है।
राज वर्मा ने कहा कि भगत सिंह के समाजवादी सपने के तहत यह जरूरी है कि स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली-पानी जैसी सुविधाएं हर व्यक्ति के लिए सुलभ हों। लेकिन अब इनका निजीकरण किया जा रहा है। इन्हें महंगा बनाकर आम जन को बुनियादी जरूरतों से वंचित किया जा रहा है। नमिता ने कहा कि इस फिल्म को देखना इतिहास की गलियों से गुजरने जैसा था। विमल किशोर ने शैलेन्द्र के गीत भगत सिंह इस बार न लेना काया भारत वासी की/ देशभक्ति के लिए आज भी सजा मिलेगी फांसी की के माध्यम याद किया।
कार्यक्रम का संयोजन सुचित माथुर ने किया। स्क्रीनिंग की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने पूरी गंभीरता के साथ फिल्म देखने और चर्चा में शिरकत के लिए सभी को धन्यवाद दिया। इस मौके पर सईदा सायरा, प्रोफेसर तमिल ए अंसारी आदि मौजूद थे।
