संसद सत्र : सभी भारतीय भाषाओं में हो यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा... DMK सांसद ने राज्यसभा में की माग

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की प्रारंभिक परीक्षा केवल हिंदी और अंग्रेजी में होने पर असंतोष जाहिर करते हुए सोमवार को राज्यसभा में द्रमुक (DMK) सदस्य पी विल्सन ने कहा कि इस स्थिति में तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक सहित गैर हिंदी भाषी मेधावी छात्र परेशानी महसूस करते हैं।

शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए विल्सन ने कहा ''यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करना हर विद्यार्थी का सपना होता है क्योंकि यह परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद जीवन की बड़ी चुनौती का हल मिल जाता है। इसलिए बड़ी संख्या में छात्र यूपीएससी की परीक्षा देते हैं''। 

उन्होंने कहा ''लेकिन दिक्कत यह है कि यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा केवल हिंदी और अंग्रेजी में होती है जबकि मुख्य परीक्षा 22 अधिसूचित भाषाओं में होती है। प्रारंभिक परीक्षा केवल हिंदी और अंग्रेजी में होने से तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक सहित गैर हिंदी भाषी होशियार छात्र इसमें परेशानी महसूस करते हैं।'' 

द्रमुक सदस्य ने कहा कि यूपीएससी के लिए छात्र एक साल मेहनत करते हैं और उनके पास न होने पर यह साल खराब हो जाता है। उन्होंने कहा कि इस परीक्षा को चक्रीय व्यवस्था के तहत लिया जाना चाहिए ताकि छात्रों का साल खराब न हो। उन्होंने मांग की कि संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा संविधान की आठवीं अनुसूचि में शामिल सभी 22 भारतीय भाषाओं में लिया जाना चाहिए। 

उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्तित्व परीक्षा बंद होना चाहिए। द्रमुक सदस्य ने दावा किया कि यूपीएससी परीक्षा में अंक लाने की पद्धति अंग्रेजी को प्राथमिकता देती है। उन्होंने कहा कि पास होने के बाद साक्षात्कार में सबसे कम अंक मिलते हैं। उन्होंने कहा ''ओबीसी छात्रों, एससी, एसटी के साथ खास तौर पर ऐसा होता है।'' 

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