26 साल पुराने वन्यजीव तस्करी मामले में छह दोषी करार, दो साल की जेल
नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की लखनऊ स्थित विशेष अदालत ने 26 साल पुराने वन्यजीव तस्करी के एक मामले में छह आरोपियों को दो साल की कैद की सजा सुनाई है। सीबीआई ने यहां जारी एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी है। इस मामले में आरोपियों पर बाघ और तेंदुए के अंगों को अवैध रूप से अपने पास रखने और उनका व्यापार करने का आरोप था।
अदालत ने सभी आरोपियों- मुमताज अहमद, जैबुन निशा, अजीज उल्लाह, वहीद, सरताज और मजीद पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह मामला जांच के दौरान चलाए गए एक बड़े बरामदगी अभियान से जुड़ा है, जिसमें आरोपियों के घरों से बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित वन्यजीव सामग्री जब्त की गई थी। जब्त की गई चीजों में तेंदुए के 18,000 नाखून, तेंदुए की 74 खालें, चार बाघों की खालें और बाघ एवं तेंदुए, दोनों की हड्डियां शामिल थीं। ये चीजें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची के अंतर्गत आती हैं, जो इन्हें उच्चतम स्तर की सुरक्षा प्रदान करती है और इन्हें अपने पास रखने, इनका व्यापार करने या इनका परिवहन करने पर सख्त रोक लगाती है।
सीबीआई ने वर्ष 2000 में यह मामला दर्ज किया था और गहन जांच के बाद 15 जुलाई 2000 को लखनऊ की सक्षम अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था।जांच में वन्यजीवों की प्रतिबंधित सामग्री की संगठित तस्करी और अवैध व्यापार में आरोपियों की संलिप्तता साबित हुई। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सभी छह आरोपियों को दोषी पाया और उन्हें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 49बी (भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी के साथ पठित) और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 51 के तहत दोषी करार दिया।
सीबीआई के एक अधिकारी ने कहा, "यह दोषसिद्धि वन्यजीव अपराधों से निपटने और अवैध तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त करने के प्रति सीबीआई की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उम्मीद है कि यह वन्यजीव तस्करी में शामिल अपराधियों के लिए एक कड़े निवारक के रूप में काम करेगा और लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण और सुरक्षा में योगदान देगा।"
