Char Dham Yatra 2026: हरिद्वार में एक अप्रैल से वृहद स्वच्छता अभियान, यात्रा में 1350 डॉक्टरों का प्रशिक्षण और तैनाती
हरिद्वार। उत्तराखंड में आगामी 19 अप्रैल से प्रारंभ होने जा रही चारधाम यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक एवं सुदृढ़ व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा मार्गों तथा ट्रांजिट कैंपों में चिकित्सा व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उत्तराखंड के जनपद हरिद्वार में की तैयारियों के तहत एक अप्रैल से वृहद स्वच्छता अभियान"शुरू किया जाएगा।
इस अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की अध्यक्षता में जिला कार्यालय सभागार में मंगलवार को बैठक आयोजित की गई, जिसमें 37 विभागों के अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित किया गया। जिलाधिकारी ने बताया कि 19 अप्रैल से शुरू हो रही चारधाम यात्रा के मद्देनजर हरिद्वार, जो कि यात्रा का प्रमुख प्रवेश द्वार है, वहां स्वच्छता और व्यवस्थाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप यह अभियान केवल औपचारिक न होकर जनसहभागिता से जनआंदोलन का रूप लेगा।
बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी नोडल अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में स्थानीय निकायों,स्वयंसेवी संस्थाओं,सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के सहयोग से व्यापक स्तर पर स्वच्छता अभियान चलाएं। अभियान के तहत नगर निगम, नगर पालिकाएं, रेलवे स्टेशन, राष्ट्रीय राजमार्ग, प्रमुख सड़कें, वन क्षेत्र, पर्यटन व धार्मिक स्थल, आश्रम, अस्पताल, आंगनबाड़ी केंद्र, औद्योगिक क्षेत्र और सभी शैक्षणिक संस्थानों में विशेष सफाई अभियान संचालित किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने विशेष रूप से चारधाम यात्रा से पूर्व प्रमुख हाईवे, मार्गों और सार्वजनिक स्थलों की गहन सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही निजी विद्यालयों को अभियान से जोड़ते हुए छात्रों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया, ताकि यह संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों, स्वयंसेवकों और संस्थाओं को सम्मानित किया जाएगा, जिससे अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी।
जिलाधिकारी ने सभी विभागों, संगठनों और आमजन से सक्रिय सहभागिता की अपील करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से हरिद्वार को स्वच्छ, सुंदर और आदर्श प्रवेश द्वार बनाया जा सकता है। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी समेत अन्य अधिकारियों ने भी अभियान को सफल बनाने के लिए समन्वय के साथ कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आर.के. सिंह, मुख्य शिक्षा अधिकारी नरेश कुमार हल्दयानी, सहायक परियोजना निदेशक नलिनीत घिल्डियाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत, जिला युवा कल्याण अधिकारी प्रमोद पांडे, उप नगर आयुक्त दीपक गोस्वामी, जिला पंचायत राज अधिकारी अतुल प्रताप सिंह, स्वजल के चंद्रकांत मणि त्रिपाठी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डी.के. चंद सहित सभी तहसीलों और विकासखंडों के नोडल अधिकारी वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।
पैरामेडिकल कर्मियों की तैनाती
स्वास्थ्य विभाग द्वारा यात्रा रूट पर लगभग 1350 डॉक्टरों एवं पैरामेडिकल कर्मियों की तैनाती हेतु विस्तृत रोस्टर तैयार किया गया है। ये टीमें विभिन्न पड़ावों, कैंपों एवं प्रमुख स्थलों पर 24 घंटे सेवाएं प्रदान करेंगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को त्वरित उपचार उपलब्ध कराया जा सके। सभी चिकित्सा कर्मियों को संबंधित जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों के अधीन रखा गया है।
स्क्रीनिंग एवं मेडिकल चेकअप सख्त व्यवस्था
यात्रा के प्रमुख प्रवेश बिंदुओं पर स्क्रीनिंग एवं मेडिकल चेकअप की सख्त व्यवस्था की जा रही है। साथ ही, यात्रा मार्गों पर आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी एडवाइजरी भी प्रदर्शित की जाएगी, ताकि श्रद्धालु यात्रा के दौरान सतर्क एवं सुरक्षित रह सकें। उत्तराखंड की महानिदेशिका, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, डॉ. सुनीता टम्टा ने मंगलवार को बताया कि चारधाम यात्रा के दौरान उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने जानकारी दी कि विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के लिए सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेजों से विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती भी की जाएगी।
इसके अतिरिक्त, यात्रा मार्गों पर 25 मेडिकल रिलीफ पोस्ट (एमआरपी) स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं का त्वरित लाभ सुनिश्चित किया जा सके। यात्रा प्रारंभ होने से पूर्व स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिकित्सकों को जनपद स्तर एवं राजधानी स्थित मेडिकल कॉलेजों में विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य चिकित्सकों को उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावी ढंग से निपटने हेतु सक्षम बनाना है। प्रशिक्षण के दौरान सांस लेने में कठिनाई, अत्यधिक थकान, रक्तचाप असंतुलन एवं हृदय संबंधी समस्याओं के त्वरित उपचार की विशेष जानकारी दी जा रही है। साथ ही, आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया देने का अभ्यास भी कराया जा रहा है।
