कृषि यूरिया की हेराफेरी की आशंका... टीजी यूरिया की छापेमारी, चार इकाइयों में ताला, एक से लिया नमूना

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Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार : औद्योगिक क्षेत्र में गुरुवार को टेक्निकल ग्रेड (टीजी) यूरिया को लेकर की गई छापेमारी से पेंट, प्लाइवुड, रेजिन आदि उत्पाद बनाने वाली इकाइयों में हड़कंप मच गया। जिलाधिकारी विशाख जी द्वारा गठित टीमों ने 16 इकाइयों में छापेमारी करके एक में टीजी यूरिया मिलने पर नमूना लिया, जबकि चार इकाइयाें में ताला लगा मिला।

जिला कृषि अधिकारी तेग बहादुर सिंह ने सरोजनी नगर और सदर, अपर जिला कृषि अधिकारी हर्षित त्रिपाठी ने बीकेटी, कृषि रक्षा अधिकारी महेश चंद्र ने मोहनलालगंज व भूमि संरक्षण अधिकारी संगीता कटियार ने मलिहाबाद क्षेत्र में प्लाइवुड, रेजिन और पेंट बनाने वाली इकाइयों पर छापेमारी की। जिला कृषि अधिकारी व एआर को-आपरेटिव वैशाली सिंह ने तिवारी गंज चिनहट स्थित प्लाईवुड इकाई मेघालय टिंबर प्रोडेक्ट में टीजी यूरिया का इस्तेमाल होने पर नमूना लिया। इसके अलावा टीमों को तिवारी गंज स्थित प्लाईवुड इकाई ओम साईं इंटरप्राइजेज, ऐशबाग क्षेत्र में प्रिंस लुबैरिकेंट व जास प्लाइवुड, तालकटोरा क्षेत्र में अवध इंडस्ट्रीज, इंदर प्लाईवुड, मार्केटिंग इंडिया, विनायक फाइबर्स, एके फाइबर बोर्ड व काकोरी में रंजीत प्लाईवुड व महोना इंटौजा में अफजल टिंबर स्टोर में टीजी यूरिया नहीं मिली। इसके अतिरिक्त ग्राम साठामऊ सीतापुरा रोड स्थित स्टार इंटरप्राइजेज में बना हुआ रेजिन का प्रयोग करते पाया। जबकि देवा रोड पर मां वैष्णों इंटरप्राइजेज, लक्ष्मी रेजिन, लक्ष्मी इंटरप्राइजेज व ग्राम गोयला बीकेटी में पेंट की इकाई जयसंस पाउडर कोटिंगस में ताला लगा मिला। बंद इकाइयों को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया जाएगा।

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उद्योग में कृषि क्षेत्र की यूरिया की रहती आशंका

दरअसल, टीजी यूरिया औद्योगिक इकाइयों में पेंट, प्लाइवुड, वार्निश, पशुआहार, कुक्कुट आहार, चीनी मिल, टीईएफ आदि चीजों में इस्तेमाल होती है। इससे रेजिन भी बनता है। जो इन सभी चीजों में प्रयोग होता है। टीजी यूरिया तीन हजार रुपये तक की बोरी आती है। इसकी बजाय कृषि क्षेत्र की अनुदानित यूरिया के इस्तेमाल की आशंका रहती है। जो अनुदान काटकर किसानों को 266.50 रुपये बोरी मिलती है। 

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