राज्यसभा में पद से हटाए जाने के बाद चड्ढा ने कहा: 'मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना'

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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नई दिल्लीः राज्यसभा में आम आदमी पार्टी (आप) के उपनेता पद से हटाए जाने के एक दिन बाद पार्टी सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को कहा कि ''मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना''। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी अपनी ही पार्टी ने कहा है कि उन्हें सदन में बोलने का मौका नहीं दिया जाए। चड्ढा ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक वीडियो पोस्ट कर कहा, ''जब भी मुझे मौका मिलता है, मैं सदन में जनता से जुड़े मुद्दों को उठाता हूं, जिनमें अक्सर अनदेखी किए जाने वाले विषय भी शामिल हैं। लेकिन क्या आम लोगों की समस्याओं के बारे में बात करना अपराध है? क्या मैंने कोई अपराध किया है?''

चड्ढा ने अपनी पार्टी पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से कहा है कि उनके संसद में बोलने पर रोक लगा दी जाए। चड्ढा ने कहा, ''आप ने संसद को सूचित किया है कि मुझे बोलने का मौका नहीं दिया जाना चाहिए। मैं उनसे कहना चाहता हूं - मेरी खामोशी को मेरी हार नहीं समझें।'' उन्होंने कहा, ''मैंने कई ऐसे मुद्दे उठाए जिनसे आम आदमी को फायदा हुआ। इससे आम आदमी पार्टी को क्या नुकसान हुआ? कोई मुझे बोलने से क्यों रोकना चाहता है?''

आप ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर चड्ढा को सदन में पार्टी के उपनेता पद से हटाने की मांग की और उनके स्थान पर पंजाब के सांसद अशोक मित्तल का नाम प्रस्तावित किया। सूत्रों के अनुसार, पत्र में कहा गया है कि पंजाब से राज्यसभा सदस्य चड्ढा को आप के कोटे से सदन में बोलने का समय नहीं दिया जाए। कभी आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के करीबी माने जाने वाले और देश के सबसे युवा सांसदों में से एक राघव चड्ढा ने पार्टी के कामकाज में खासकर पंजाब और दिल्ली में आप के कार्यकाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

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