सहारनपुर : गन्ने की खेती पर प्रतिकूल असर, 30% की गिरावट, पापुलर की ओर बढ़ा किसानों का रूझान 

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Published By Anjali Singh
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सहारनपुर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आर्थिक स्थिति की नगदी फसल माने जाने वाला गन्ना इस वर्ष बेमौसम के ज्यादा बारिश होने और किसानों द्वारा पापुलर के साथ गन्ने की खेती करने से इसकी पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ा है और 15 से 20 फीसद तक कमी आई है।

सहारनपुर मंडल के गन्ना उपायुक्त ओमप्रकाश सिंह ने शुक्रवार बताया कि बाजार में पापुलर के दामों में दो-तीन साल के दौरान हुई भारी बढ़ोत्तरी की वजह से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों का रूझान अचानक पापुलर की खेती की ओर बढ़ा है। 

वर्ष 2023 में पापुलर 1000 रूपए प्रति क्विंटल पर बिक रहा था और इस समय बाजार में इसकी कीमत 1500 से 1700 रूपए प्रति क्विंटल है। उन्होंने बताया कि 30 से 35 फीसद क्षेत्रफल में किसान गन्ने और पापुलर की एक साथ खेती कर रहे हैं। इससे गन्ना किसानों की समस्या बढ़ी है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में तीन जुलाई, सात जुलाई, 26 जुलाई, 27 और 28 जुलाई, तीन अगस्त तथा आठ अगस्त को रिकार्ड 1982 एमएम बारिश हुई, जबकि पिछली बार इस दौरान 1062 एमएम बारिश हुई थी।

ज्यादा बारीश ने गन्ने की पेड़ी में 2-3 कल्ले (कोपले) यानि टीलर्स भी फूटता है जबकि सामान्य स्थिति में ये पांच से छह संख्या में कल्ले फूटते हैं। उल्लेखनीय है कि हरेक कल्ले यानी कोपल से एक गन्ना निकलता है। इस तरह से गन्ने की पैदावार में बारिश के कारण गिरावट आई।

दूसरे जिन किसानों ने गन्ना और पापुलर एक साथ लगाया हुआ है, वहां पापुलर के पेड़ बड़े होने से उनकी पत्तियों में रोग लगने और पत्तियों के टूटकर गन्ने की पत्तियों को नुकसान पहुंचाने से गन्ने की वृद्धि में रूकावट पैदा हुई है। उन्होंने बताया कि पापुलर की पत्तियों में कीड़े लग जाते हैं और गन्ने की जड़ों एवं पत्तियों को नुकसान पहुंचाते हैं। 

गन्ने का क्षेत्रफल एवं पैदावार घटने का एक अन्य कारण सहारनपुर मंडल और गन्ना बेल्ट के दूसरे इलाकों में हाईवे के निर्माण के लिए खेतों की जमीन का बड़े स्तर पर अधिग्रहण किया जाना भी है। पिछले वर्ष सहारनपुर मंडल में करीब 600 करोड़ कीमत गन्ने की अतिरिक्त पैदावार हुई थी। तब पापुलर छोटे थे। एक वर्ष में उनके बड़े होने से उनकी पत्तियों की छाया का भी गन्ने की पैदावार पर बहुत बुरा असर पड़ा।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014-2015 और 2015-2016 में गन्ना बेल्ट में पापुलर की खेती में काफी वृद्धि हुई थी। उस कारण गन्ने की पैदावार आधी रह गई थी यानि 9 करोड़ 80 लाख क्विंटल गन्ना हुआ था, जबकि वर्ष 2024-2025 में पापुलर की खेती कम हो जाने पर गन्ना उत्पादन बढ़कर दोगुना यानी 18 करोड़ क्विंटल हो गया था। इस बार पापुलर के कारण गन्ने की पैदावार में भारी गिरावट आई है। सहारनपुर मंडल जिसमें 17 चीनी मिलों ने पेराई की और सात चीनी मिलें अभी भी पेराई कर रही है। 

अभी तक 14 करोड़ क्विंटल कुल गन्ने की पेराई हुई है और यह पेराई सत्र खत्म होने पर ज्यादा से ज्यादा बढ़कर 15 करोड़ क्विंटल हो सकती है। गन्ना उपायुक्त ने कहा कि शामली और मुजफ्फरनगर के तितावी एवं बुढ़ाना चीनी मिल क्षेत्र में गन्ने में लाल मकड़ी का प्रभाव भी देखने को मिला। लेकिन सहारनपुर जनपद में गन्ना पूरी तरह से रोगमुक्त रहा। 

उन्होंने कहा कि इस वर्ष तापमान में उतार-चढ़ाव और सामान्य या उससे कहीं अधिक बारीश होने से गन्ने की पैदावार को कम करने का काम किया है। श्री सिंह ने कहा कि गन्ने की पैदावार में तो गिरावट आई है लेकिन गन्ने की मिठास यानि चीनी परते में 0.65 फीसद की वृद्धि हुई है। पिछले सीजन में चीनी रिकवरी 10.10 थी इस बार यह 10.75 फीसद रही है। यानी गन्ने की पैदावार में भारी गिरावट के बावजूद चीनी उत्पादन में उतनी गिरावट नहीं आएगी। 

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