Bareilly : भड़के सछास कार्यकर्ताओं ने एसएसपी कार्यालय में दिया ज्ञापन, बरेली कॉलेज में प्राचार्य का घेराव
अभद्रता करने वालों पर कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी
बरेली, अमृत विचार। बरेली कॉलेज में बुधवार को चीफ प्रॉक्टर प्रो. आलोक खरे के साथ अभद्रता, गाली-गलौज और धक्का-मुक्की के विरोध में गुरुवार को समाजवादी छात्र सभा भड़क उठी। समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ता गुरुवार को एसएसपी कार्यालय में ज्ञापन देने पहुंचे। क्षेत्राधिकारी प्रथम आशुतोष शिवम ने ज्ञापन लिया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने बरेली कॉलेज में प्रचार्य का घेराव किया और तीखा विरोध जताया।
प्रो. आलोक खरे की एक सोशल मीडिया पोस्ट के विरोध में बुधवार को अभाविप कार्यकर्ताओं ने बरेली कॉलेज में प्राचार्य कक्ष में जमकर हंगामा,नारेबाजी की थी। धक्का-मुक्की भी की गई थी। इसके बाद प्राचार्य ने प्रो. आलोक को चीफ प्राक्टर पद से हटा दिया। इस मामले को लेकर गुरुवार को समाजवादी छात्र सभा ने माेर्चा संभाल लिया। संगठन के जिलाध्यक्ष अविनाश मिश्रा के नेतृत्व में सछास के प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्राधिकारी प्रथम अशुतोष शिवम को ज्ञापन दिया। घटना के वीडियो साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की गई। छात्र सभा ने कहा कि इस संगठन के द्वारा इससे पहले भी नगर आयुक्त के साथ कार्यालय में अभद्रता की गई। कार्रवाई नहीं होने के कारण ऐसे तत्वों के हौसले बार-बार बढ़ रहे हैं।
बरेली कॉलेज में प्राचार्य का घेराव
एसएसपी कार्यालय में ज्ञापन देकर कार्यकर्ता बरेली कॉलेज प्राचार्य का घेराव करने पहुंचे। सछास जिलाअध्यक्ष अविनाश मिश्रा और महानगर अध्यक्ष विक्रांत सिंह पाल ने कहा कि हम प्रोफेसर की पोस्ट का सर्मथन नहीं करते हैं लेकिन प्राचार्य कार्यालय में अभद्रता भी नहीं होनी चाहिए थी। हम इस घटना का विरोध करते हैं। उन्होंने कॉलेज प्रशासन से दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। जल्द कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी। प्राचार्य प्रो. ओपी राय ने कहा कि इस अभद्रता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान पिंक्कू गुर्जर, राशिद मेवाती, संजय, अभिषेक, कृष्णा, राधव, समीर के साथ बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
विरोध या सुनियोजित षड्यंत्र, दिन भर होती रही चर्चा
बरेली कॉलेज में बवाल के बाद गुरुवार को पूरे दिन घटनाक्रम को लेकर शिक्षकों के बीच चर्चा होती रही कि यह केवल विरोध प्रदर्शन था या साजिश। 19 मार्च को प्रोफेसर प्रो. आलोक खरे ने सोशल मीडिया पोस्ट की थी, लेकिन माहौल उसके दो सप्ताह के बाद गरमाया। 1 अप्रैल को अचानक हालात बिगड़ गए। प्रो. आलोक ने भी पूरे घटनाक्रम को षड्यंत्र करार दिया। चीफ प्रॉक्टर पद को लेकर उन्होंने कहा कि मैंने खुद ही 30 मार्च को अपना त्याग पत्र प्राचार्य को सौंप दिया था। इसके बाद मुझे चीफ प्रॉक्टर से हटाया कैसे जा सकता हैं। उन्होंने कहा कि कॉलेज में मेरे कुछ प्रतिद्वंदी चीफ प्रॉक्टर पद को प्राप्त करने के इच्छुक थे। इसके लिए राजनीतिक द्वेष से प्रेरित होकर वातावरण को अशांत करने का प्रयास किया। उन्होंने कुछ छात्रों को उकसाया, जिसके परिणामस्वरूप एक उग्र भीड़ ने मुझ पर हमला करने का प्रयास किया। इसके लिए प्राचार्य से दोषियों के विरुद्ध कठोर एवं त्वरित कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा है। इससे उनकी गरिमा को आघात आघात पहुंचा है।
शिक्षक संघ ने प्राचार्य से की कार्रवाई की मांग
शिक्षक संघ ने गुरुवार को प्राचार्य प्रो. ओपी राय से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम पर चर्चा की। शिक्षक संघ ने कहा कि कॉलेज में एक शिक्षक का अपमान होना निंदनीय हैं। कॉलेज परिसर में ही शिक्षक सुरक्षित नहीं हैं। शिक्षक संघ के महामंत्री प्रो. वीपी सिंह ने कहा कि प्राचार्य ने कार्यालय में हुई अभद्रता के दोषियों पर कार्रवाई करने के लिए 2 दिन का समय मांगा है। दो दिन में कार्रवाई नहीं होती है तो सोमवार को फिर से प्राचार्य से मिलेंगे।शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. विजेंद्र पाल सिंह, प्रो. अविनाश अग्रवाल, प्रो. शिखा वर्मा, रितु अग्रवाल, प्रो. राजेंद्र सिंह, प्रो. बीनम सक्सेना आदि मौजूद रहे।
शिक्षक संघ ने मामले की गंभीरता को लेकर सार्थक चर्चा की। उन्होंने प्राचार्य सहित शिक्षकों की सुरक्षा का मुद्दा रखा। मैंने भी उनको आश्वासन दिया कि शिक्षक के साथ हुई अभद्रता के मामले पर बड़ी और कठोर कार्रवाई की जाएगी। मैंने पुलिस को कार्रवाई के लिए लिखा है। -प्रो. ओपी राय, प्राचार्य।
