Bareilly डेढ़ सौ गांवों में बाढ़ का जोखिम, शासन को भेजी सीमांकन रिपोर्ट
बरेली, अमृत विचार। रामगंगा नदी किनारे के डेढ़ सौ गांवों में बाढ़ का जोखिम बना हुआ है। भविष्य में इन गांवों को नगर निगम या निकायों में शामिल नहीं कर सकेंगे। निर्माण पर भी रोक लगा दी गयी है। सभी गांव रामगंगा नदी के फ्लड जोन एरिया में शामिल किये हैं। एनआईएच (नेशनल इंस्टीट्यूट हाइड्रोलॉजी) रुड़की के फ्लड जोन एरिया का सीमांकन कार्य करने के बाद जिला पर्यावरण समिति की बैठक में चर्चा कर डीएम अविनाश सिंह के निर्देश पर इन गांवों में निर्माण कार्य प्रतिबंधित किए गए हैं। मुरादाबाद बाढ़ खंड ने कार्ययोजना शासन को भेज दी है।
दरअसल, जिले की तहसील सदर, मीरगंज, फरीदपुर, आंवला के 150 गांवों को रामगंगा की बाढ़ के जोखिम में माना गया है। बाढ़ की तबाही रोकने के उद्देश्य से नदी किनारे फ्लड जोन एरिया बनाया है। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता नीरज कुमार लांबा की ओर से सभी उप जिलाधिकारियों को फ्लड जोन एरिया की प्रारंभिक रिपोर्ट पहले ही भेजी जा चुकी है। इस कार्य काे मुरादाबाद बाढ़ खंड देख रहा है। मुरादाबाद बाढ़ खंड ने नेशनल इंस्टीट्यूट हाइड्रोलॉजी रुड़की से फ्लड प्लेन एरिया का सीमांकन कार्य पूरा कराया। सीमांकन कार्य की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर बरेली बाढ़ खंड ने बीडीए को पत्र भेजा था। जिसमें बीडीए को जानकारी दी गयी कि फ्लड जोन में शामिल किए गए गांवों में भविष्य में नयी टाउनशिप बसाने की योजना तैयार न करें। नगर निगम को इन गांवों में अपनी सीमा में शामिल कर शहरीकरण न करने के लिए कहा गया।
बाढ़ खंड बरेली अधिशासी अभियंता,नीरज कुमार लांबा ने बताया कि गांवों का सत्यापन कार्य पूरा हो चुका है। प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर इन गांवों में नये निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी है। तीन दिन पहले कलेक्ट्रेट सभागार में जिला पर्यावरण समिति की बैठक में डीएम से इस पर चर्चा हुई। डीएम ने शासन से अनुमति मिलने तक फ्लड जोन में शामिल गांवों में निर्माण कार्य प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए। एसडीएम को निगरानी करने के लिए कहा है।
