Consumers की सहमति बिना प्रीपेड मीटर लगाए जाने पर उठे सवाल, नियामक आयोग से पोस्टपेड विकल्प बहाल करने की मांग
लखनऊ, अमृत विचार: स्मार्ट मीटर को लेकर प्रदेश में बिजली कंपनियों के खिलाफ नाराजगी बढ़ती जा रही है। आरोप है कि पावर कॉरपोरेशन और बिजली कंपनियों ने उपभोक्ताओं की सहमति के बिना ही बड़े पैमाने पर प्रीपेड स्मार्ट मीटर लागू कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि लाखों मीटर प्रीपेड मोड में किए जा चुके हैं और नए कनेक्शन भी प्रीपेड मीटर के साथ ही दिए जा रहे हैं।
यह मामला केंद्र सरकार की आरडीएसएस योजना से जुड़ा है, जिसके तहत पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदला जा रहा है। हालांकि इन मीटरों को प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों मोड में चलाया जा सकता है, लेकिन उपभोक्ताओं का आरोप है कि उन्हें विकल्प नहीं दिया गया।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि इस मामले में बिजली कंपनियों के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की जाएगी। साथ ही नियामक आयोग से मांग की जाएगी कि उपभोक्ताओं को पोस्टपेड का विकल्प दिया जाए और भविष्य में उनकी सहमति अनिवार्य की जाए।
