बरेली: जेल में खेल से बदला जा रहा बंदियों का जीवन

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

संजय शर्मा, बरेली। ऐसा पहली बार हुआ कि खामोशियों की जगह जेल की ऊंची और दीवारों से तालियों की आवाज बाहर आ रही थी। रोने की जगह लोग खिलखिलाकर तालियां पीटते हुए हंस रहे थे। बीच-बीच में गानों की धुन थिरकने पर मजबूर कर रही थी। इस बार जेल में न कोई कातिल मिला, न …

संजय शर्मा, बरेली। ऐसा पहली बार हुआ कि खामोशियों की जगह जेल की ऊंची और दीवारों से तालियों की आवाज बाहर आ रही थी। रोने की जगह लोग खिलखिलाकर तालियां पीटते हुए हंस रहे थे। बीच-बीच में गानों की धुन थिरकने पर मजबूर कर रही थी। इस बार जेल में न कोई कातिल मिला, न ही कोई बदमाश नजर आ रहा था। यह पहली बार था कि जेल के मैदान में पुलिस जज बनी थी और वहां उपस्थित लोग उनका कहना मान रहे थे। लूट, डकैती, चोरी के आरोपी अपराध को भूलकर झूमते-नाचते हुए दिखे। परिवार से आठ माह से मुलाकात किए बिना 2750 लोगों के चेहरों पर जो चमक थी वह किसी दीपावली की रोशनी से कम नहीं थी।

जिला जेल अधीक्षक विजय विक्रम सिंह ने जेल में बंद बंदियों को कोरोना काल में तनाव से दूर रखने के लिए अनूठे प्रयोग किए। पहली बार जिला जेल में रामलीला का मंचन बंदियों द्वारा किया गया। अब परिवार से मुलाकात बंद होने के चलते बंदी तनाव में आ रहे थे। इससे बचाने के लिए जेल अधीक्षक ने जेल प्रीमियर लीग का आयोजन किया। इसके तहत हर बैरक की टीम बनाई गई और रोज दो मैच कराए जा रहे हैं। जिस बैरक का मैच होता है वहां बंद सभी बंदी मैदान में होते हैं। अपनी-अपनी टीम का मनोबल बढ़ाने के लिए कभी तालियां बजाते हैं तो कभी हूटिंग करते हैं।

सुबह दस से शाम चार बजे तक जेल का मैदान स्टेडियम बना रहता है। पुलिसकर्मी अंपायर बनकर जीत और हार का फैसला करते हैं। उनका निर्णय ही सबको मानना होता है। हाथों में झंडे लिए क्रिकेट टीम के चाहने वाले हर गेंद पर अपनी क्रिया और प्रतिक्रिया दर्ज कराते हैं। जेल अधीक्षक की इस पहल से वहां बंद लोगों के चेहरों पर जो मुस्कुराहट आती है वह उनके परिवार से मुलाकात की कमी को काफी हद तक पूरा कर देती है।

“जेल में आया हुआ हर व्यक्ति को तनाव मुक्त रखना उनकी जिम्मेदारी है। इसके लिए मोटीवेशनल कार्यक्रम के साथ योग, ध्यान के साथ खेलों का आयोजन भी करते हैं। साथ ही साफ निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी पुलिसकर्मी किसी भी बंदी के साथ गाली-गलौच नहीं करेगा।” -विजय विक्रम सिंह, अधीक्षक जिला जेल

संबंधित समाचार