NRHM घोटाले के तीन मामलों में पूर्व सीएमओ को राहत, हाईकोर्ट ने सीबीआई कोर्ट की कार्यवाही पर लगाई रोक

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Published By Anjali Singh
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लखनऊ : हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाला से जुड़े तीन अलग-अलग मामलों में पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अनिल कुमार शुक्ला को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ विशेष अदालत, भ्रष्टाचार निवारण/सीबीआई, गाजियाबाद में चल रही अभियोजन की कार्यवाहियों पर अंतरिम रोक लगा दी है। ये आदेश न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने डॉ. अनिल कुमार शुक्ला की ओर से दाखिल तीन अलग-अलग याचिकाओं पर पारित किए हैं। 

वर्ष 2007 से 2009 के बीच दवाओं व उपकरणों की खरीद में अनियमितता कर सरकारी धन के दुरुपयोग करने के आरोप में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की थीं। याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नंदित श्रीवास्तव की दलील थी कि उसके विरुद्ध कोई भी ठोस साक्ष्य नहीं है। कहा गया कि याची ने संबंधित सीबीआई कोर्ट में डिस्चार्ज अर्जी दाखिल कर रखी है, लेकिन उसका निस्तारण नहीं किया जा रहा है, लिहाजा उसे हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी है। याची की उम्र 73 वर्ष है, लेकिन इस उम्र में उसे प्रताड़ित होना पड़ रहा है। 

वहीं सीबीआई के अधिवक्ता अनुराग कुमार सिंह ने याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट में डिस्चार्ज अर्जी लंबित है, जिसके रहते हाईकोर्ट में याचिकाएं सुनवाई योग्य नहीं हैं, लेकिन न्यायालय उनके इस तर्क से सहमत नहीं हुई। कोर्ट ने पाया कि घटनाएं 17 से 19 वर्ष पुरानी हैं, इनमें से एक मामले में तो याची ने सीएमओ के रूप में केवल डेढ़ दिन ही कार्य किया था। 

न्यायालय ने यह भी पाया कि चार्जशीट और कोर्ट द्वारा संज्ञान ली गई धाराओं में अंतर है तथा एक प्रकरण में पूरक चार्जशीट बिना आवश्यक अभियोजन स्वीकृति के दाखिल कर दी गई है। कोर्ट ने तीनों याचिकाओं को मई के प्रथम सप्ताह में सूचीबद्ध करते हुए सीबीआई को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है, साथ ही याची के खिलाफ चल रही कार्यवाहियों पर अंतरिम रोक लगा दी है।

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