UP News: एडेड माध्यमिक स्कूलों में प्रिंसिपल के 55 प्रतिशत पद खाली, 13 साल से नहीं हुई भर्तियां

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Published By Muskan Dixit
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सरकारी सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रिंसिपल और हेडमास्टर की भर्ती में 13 वर्षों से चल रही देरी का असर अब साफ तौर पर दिखने लगा है। प्रदेश के 75 जिलों से प्राप्त ताजा आंकड़ों के अनुसार, कुल स्वीकृत पदों में से आधे से अधिक पद खाली हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों के संचालन पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। प्रयागराज स्थित माध्यमिक शिक्षा निदेशालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी से मिली जानकारी के मुताबिक, इंटर कॉलेजों में 1,502 प्रिंसिपल और हाईस्कूलों में 1,003 हेडमास्टर के पद रिक्त हैं। इस तरह कुल 2,505 पद खाली हैं, जो कि 55.51 प्रतिशत के बराबर है। अब इन पदों पर भर्ती की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को सौंपी गई है। 

विभागीय सूत्रों के अनुसार, माध्यमिक शिक्षा विभाग जल्द ही इन रिक्तियों का विवरण ऑनलाइन भेजेगा, जिसके बाद भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने माना कि नियमित प्रिंसिपलों की कमी से न केवल छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि स्कूलों में अनुशासन बनाए रखना और नियमों का पालन कराना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। 

दरअसल, दिसंबर 2013 में तत्कालीन माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने 632 प्रिंसिपल और हेडमास्टर पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। फरवरी 2014 तक आवेदन लिए गए, लेकिन लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद नवंबर 2022 में 581 पदों का परिणाम घोषित हुआ। हालांकि, फरवरी 2023 में हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने चयन प्रक्रिया में नौ साल की देरी को आधार बनाते हुए भर्ती रद्द कर दी। इस दौरान ज्वाइन कर चुके 150 से अधिक प्रिंसिपलों को बरकरार रखा गया, जबकि 400 से ज्यादा पद फिर खाली रह गए। इसी तरह सरकारी सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों से जुड़े 553 प्राथमिक स्कूलों में भी शिक्षकों की भारी कमी है। यहां स्वीकृत 4,838 सहायक अध्यापक पदों में से 1,889 पद खाली हैं, जो करीब 39 प्रतिशत है। इन स्कूलों में भी लंबे समय से कोई नई भर्ती नहीं हुई है।

इसके अलावा, माध्यमिक विद्यालयों में 16,114 सहायक अध्यापक और 2,705 प्रवक्ता (लेक्चरर) के पद भी वर्तमान में रिक्त हैं। शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों का भी मानना है कि समय पर भर्ती न होने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और छात्रों के भविष्य पर भी इसका असर पड़ सकता है। इसलिए सरकार को जल्द से जल्द इस कमी को दूर करना चाहिए। 

इस बीच, इस मामले की लेकर माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रादेशिक उपाध्यक्ष और प्रवक्ता डॉ. आर पी मिश्रा ने बताया कि 2012 के बाद से माध्यमिक स्कूलों में प्रधानाचार्यों की नियुक्तियां नहीं हुई हैं। जिन स्कूलों में पद खाली हैं वहां सीनियर अध्यापकों को प्रधानाचार्य की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। इसी से काम चल रहा है। यह पूछे जाने पर कि क्या इस मामले को लेकर शिक्षक संघ की ओर से सरकार से कोई अनुरोध किया गया है, इसको लेकर मिश्र ने कहा, "संघ की ओर से समय समय पर इस मामले को लेकर सरकार को अवगत कराया गया है। सरकार की तरफ़ से कहा गया है कि जल्द ही इस मामले को लेकर ठोस क़दम उठाया जाएगा । बताया गया है कि शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से जल्द ही इस संदर्भ में विज्ञापन निकाला जाएगा।"

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