मथुरा नौका दुर्घटना : लापता यात्रियों की तलाश में जुटी NDRF-SDRF, DIG बोले-सभी के मिलने तक जारी रहेगा अभियान 

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Published By Anjali Singh
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मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में यमुना नदी में एक नौका के पलट जाने से 10 लोगों की मौत की घटना के एक दिन बाद शनिवार सुबह भी लापता यात्रियों की तलाश के लिए अभियान जारी रहा। यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी। अधिकारी के अनुसार, पांच लोग अब भी लापता हैं। पुलिस उप महानिरीक्षक शैलेष कुमार पांडेय ने कहा, ''नौका को बरामद कर लिया गया है। यह हमारे लिए एक बड़ी चुनौती थी। पिछले चार घंटे से हम नौका को निकालने की कोशिश कर रहे थे, जो पलटने के बाद गहरे दलदली इलाके में फंस गई थी।'' 

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमों ने नौका को निकालने के लिए पेशेवर तरीके से काम किया। पांडेय ने कहा, ''पांच लोग अब भी लापता हैं। सभी के मिलने तक तलाश अभियान जारी रहेगा।'' डीआईजी ने बताया, ''दुर्घटना में घायल लोगों की हालत स्थिर है। शवों का पोस्टमार्टम हो चुका है और उन्हें परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया जारी है।'' 

उन्होंने कहा, ''घटना का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। कमियों को दूर कर बेहतर सुरक्षा मानदंड सुनिश्चित किए जाएंगे। दुर्घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।'' मथुरा से सांसद हेमा मालिनी ने इस घटना में लोगों की मौत पर शोक व्यक्त किया। अपने संदेश में उन्होंने कहा, ''मुझे जान-माल के नुकसान के बारे में सुनकर गहरा दुख हुआ है। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। मैं भगवान कृष्ण से घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने और मृतकों के परिजनों को शक्ति देने की प्रार्थना करती हूं।'' 

पुलिस के अनुसार, पंजाब के पर्यटकों को ले जा रही एक नौका शुक्रवार दोपहर वृंदावन में यमुना नदी में पलट गई, जिससे कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई, 22 घायल हो गए और पांच लोग लापता हैं। उन्होंने बताया कि यह दुर्घटना केसी घाट के पास उस समय हुई, जब नौका गहरे पानी में जाने के बाद एक तैरते हुए पोंटून (पीपा पुल का हिस्सा) से टकरा गई। 

अधिकारियों के अनुसार, इलाके में जल स्तर बढ़ने के कारण पीपा पुल को हाल में हटा दिया गया था, जिससे नदी में कुछ पोंटून खुले रह गए थे। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने पहले छह मौतों की पुष्टि की थी, बाद में बचावकर्मियों ने चार और शव बरामद किए, जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर 10 हो गई।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मृतकों की पहचान कविता रानी, चरनजीत, सपना हंस, रिकेश गुलाटी, मधुर बहल, आशा रानी, पिंकी बहल, अंजू गुलाटी, इशान कटारिया और मीनू बंसल के रूप में हुई है। लापता लोगों में माणिक टंडन, पंकज मल्होत्रा, ऋषभ शर्मा, यश भल्ला और मोनिका शामिल हैं। ये सभी पर्यटक पंजाब के लुधियाना और मुक्तसर से वृंदावन आए लगभग 150 तीर्थयात्रियों के एक बड़े समूह का हिस्सा थे। 

वृंदावन नाव हादसे में लापता पांच लोगो की तलाश दूसरे दिन भी जारी

हादसे में एक परिवार के सात सदस्यों समेत दस लोगों की मृत्यु हो चुकी है। शनिवार को दूसरे दिन भी सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि वृंदावन यमुना नदी हादसे में अब तक 10 लोगो की मृत्यु हो चुकी है जबकि 22 लोगो का सफल रेस्क्यू किया जा चुका है। साथ ही लापता पांच लोगो के लिए सर्च ऑपरेशन अभी जारी है। लुधियाना के जगराओं से आए एक ही परिवार के सात लोग जिनमें मां-बेटे, चाचा-चाची और बुआ-फूफ़ा शामिल हैं मौत के मुंह मे समा गए। 

रेस्क्यू टीम में सेना, एनडीआरएफ और उनकी,8 बोट, साथ ही एसडीआरएफ उसकी पांच बोट और पीएसी समेत 250 लोगों का दल सर्च ऑपरेशन में दिन रात लगा हुआ है। हादसे में जीवित बचे प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे श्रद्धालुओं से भरी नाव जुगल घाट से रवाना हुई थी। तट से लगभग 50 फीट दूर यमुना के बीच में 40 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रही तेज हवाओं के कारण नाव डगमगाने लगी।

श्रद्धालुओं ने नाविक से नाव रोकने की गुहार लगाई थी, क्योंकि आगे पीपा पुल (पांटून पुल) था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि नाव दो बार टकराते-टकराते बची, लेकिन तीसरी बार पुल से जोरदार टक्कर हुई और नाव 25 फीट गहरे पानी में पलट गई। जांच में सामने आया है कि नाविक पप्पू निषाद ने किसी भी श्रद्धालु को लाइफ जैकेट नहीं दी थी। हादसे के बाद नाविक मौके से फरार हो गया था, जिसे पुलिस ने रात 9 बजे हिरासत में ले लिया है।

शुरुआती जांच के अनुसार, नाव की क्षमता कम की थी, लेकिन सुरक्षा मानकों की पूरी तरह अनदेखी की गई। रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे अधिकारियों का कहना है कि यमुना का बहाव काफी तेज है, जिससे लापता लोगों के बहकर दूर जाने की आशंका है। इसके अलावा नदी की तलहटी में जमा गाद ,कीचड़ और रेत में शवों के दबे होने की संभावना जताई जा रही है। 

प्रशासन का अनुमान है कि 24 घंटे बीतने के बाद शव फूलकर पानी की सतह पर आ सकते हैं। सभी श्रद्धालु लुधियाना के 'श्री बांके बिहारी क्लब' की ओर से आयोजित 4 दिवसीय यात्रा पर आए थे। मृतकों की पहचान मधुर बहल, उनकी माता कविता बहल, चाचा चरणजीत, चाची पिंकी बहल, बुआ आशा रानी, अंजू गुलाटी और फूफा राकेश गुलाटी के रूप में हुई है। एसपी ग्रामीण सुरेश चंद्र रावत ने बताया, "प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ लापता लोगों की संख्या का मिलान कर रहा है। रेस्क्यू ऑपरेशन में स्थानीय गोताखोरों की भी मदद ली जा रही है ताकि जल्द से जल्द लापता लोगों का पता लगाया जा सके।

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