Bareilly: जमीनों पर कब्जेदारी के खेल में फिर गरमा रही रामगंगा की कटरी
फरीदपुर, अमृत विचार। जमीनों पर कब्जेदारों को लेकर कई बार खून-खराबे के दौर दे चुकी रामगंगा की कटरी फिर गरमा रही है। खादर क्षेत्र में खाली पड़ी जमीनों को हथियाने के चक्कर में रंजिशें बढ़ रही हैं। दो दिन पहले फरीदपुर क्षेत्र के गोवन्दिपुर गांव में रंजिश के चलते दो गुटों के बीच अंधाधुंध फायरिंग और पुलिस पर हमले ने प्रशासन की चिंताएं फिर बढ़ा दी हैं।
पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए गोलीबारी में इस्तेमाल लाइेंसी हथियार जब्त कर कई लोगों को गिरफ्तार जरूर कर लिया है, लेकिन कटरी क्षेत्र में तनातनी ने भविष्य की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। रामगंगा की कटरी में खाली पड़ी जमीनों पर कब्जे का खेल नया नहीं है।
11 जनवरी 2023 को दबंग सपा नेता सुरेश पाल सिंह और सरदार परमजीत सिंह गुटों में जमीनों पर कब्जेदारी को लेकर खूनी संघर्ष किया था। इसमें कुछ लोग मारे गए थे और कई घायल होकर लंबे समय अस्पतालों में भर्ती नजर आए थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि दबंगों के बीच जमीनें हथियाने की लड़ाई इसलिए भी कभी खत्म नहीं होती, क्योंकि फसल बोता कोई है और काटता कोई और।
चकबंदी प्रक्रिया में कमी से बढ़ रहे विवाद
दबंगों को राजनैतिक संरक्षण का खेल रंजिशों को और हवा देता है, जिसकी वजह से पुलिस-प्रशासन लाख कवायद के बाद भी हर बार नया टकराव सामने आता रहता है। कटरी क्षेत्र में रहने वाले लोग बताते हैं कि चकबंदी प्रक्रिया में कई तरह की कमियां होने से विवाद बढ़ रहे हैं। चकबंदी सीओ श्याम नारायण अग्निहोत्री बताते हैं कि रायपुर हंस रायपुर तोमकन में चकबंदी चल रही है। हम आवंटन नही करते हैं। नदी की जो जमीन जलमग्न होती है, उसको चकबन्दी से पृथक रखा जाता है। प्रयास रहता है किसानों की जमीन सुरक्षित रह सके। जिनका विनिमय अनुपात नहीं होता, उनको चकबंदी में शामिल नहीं किया जाता।
डकैत कल्लू मारा गया मगर कटरी शांत नहीं हुई
बरेली नहीं नहीं, बल्कि शाहजहांपुर, बदायूं, एटा, फर्रुखाबाद सहित कई जिलों में लंबे समय आतंक का पर्याय बना रहा कलुआ डकैत भी रामगंगा के कटरी क्षेत्र में सक्रिय रहा था। कलुआ गैंग ने दर्जनों पुलिसकर्मियों की हत्या कर डाली थी और उसके नाम से लोग कांपते थे। कल्लू गैंग के नाम पर भी कटरी में जमीनों पर कब्जे का खेल चला था। 15 जनवरी सन् 2006 को थाना कटरी में तत्कालीन एसओजी प्रभारी विजय राणा और थाना फतेहगंज पूर्वी पुलिस के साथ मुठभेड़ में कल्लू उर्फ कलुआ डकैत मारा गया था।
उसके बाद कल्लू गैंग के कई सदस्य अलग-अलग समय और स्थानों पर पुलिस के साथ मुठभेड़ों में ढेर होते रहे। कल्लू का दाहिना हाथ डकैत देवेन्द्र गुर्जर कोर्ट में सरेंडर कर गया था और अब तक जेल में बंद है। माना जा रहा था कि डकैत गिरोह के सफाए के बाद कटरी का माहौल शांत हो जाएगा मगर ऐसा हुआ नहीं। जमीनों पर कब्जे के खेल दबंग गुट आपस में बार-बार टकराते आ रहे हैं। सुरेश प्रधान और परमजीत सिंह गुटों के बीच गैंगवार भी उसी खेल का नतीजा थी। और अब 9 अप्रैल को गोविंदपुर गांव में दो गुटों के बीच संघर्ष ने पुलिस की टेंशन बढ़ाने का काम किया है।
