Fire Service Day: लखनऊ में एक साल में 2848 अग्निकांड, 250 भवनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू
गांव तक पहुंचने की तैयारी, चार नए फायर स्टेशन से मिलेगी रफ्तार
लखनऊ, अमृत विचार : राजधानी में तेजी से बढ़ रहे अग्निकांड को देखते हुए अग्निशमन विभाग संसाधनों को सुदृढ़ करने में जुटा है। 14 अप्रैल को अग्निशमन दिवस के अवसर पर कई नई योजनाओं को शुरू करने की तैयारी की जा रही है। शहरी विस्तार अब ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच चुका है, ऐसे में विभाग गांवों तक अपनी पहुंच मजबूत करने के लिए चार नए फायर स्टेशन स्थापित करने जा रहा है, जिससे दूरदराज क्षेत्रों में होने वाली आग की घटनाओं पर समय रहते काबू पाया जा सके।
अग्निशमन विभाग के अनुसार गोसाईगंज, मलिहाबाद, पारा समेत चार क्षेत्रों में नए फायर स्टेशन खोले जाएंगे। गोसाईगंज और मलिहाबाद में निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, जबकि बसंत कुंज योजना और अनंत नगर योजना (मोहान रोड) में जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होगा। इन स्टेशनों के शुरू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में आग की घटनाओं के दौरान रिस्पांस टाइम में कमी आएगी और राहत कार्य तेज होंगे।
हाईराइज भवनों में अग्निकांड से निपटने के लिए वर्तमान में केवल एक हाइड्रोलिक प्लेटफार्म उपलब्ध है। इसकी संख्या बढ़ाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। विभाग ऊंची इमारतों में आग बुझाने के लिए हाइड्रोलिक प्लेटफार्म और आर्टिकुलेटेड वाटर टावर का उपयोग कर रहा है। इसके अलावा मल्टी डिजास्टर रिस्पांस व्हीकल भी उपलब्ध है, जो विभिन्न आपदाओं में त्वरित और सुरक्षित रेस्क्यू करने में सक्षम है।
सीएफओ अंकुश मित्तल के अनुसार राजधानी में वर्तमान में 10 फायर स्टेशन संचालित हैं और 30 अत्याधुनिक अग्निशमन वाहन उपलब्ध हैं, जिनमें फोम टेंडर, वाटर बाउजर, बड़े व छोटे फायर टेंडर तथा क्विक रिस्पांस व्हीकल शामिल हैं। उन्होंने बताया कि तेजी से बढ़ती आबादी और बदलते शहरी ढांचे को देखते हुए विभाग को लगातार आधुनिक बनाना आवश्यक है।
सुरक्षा के मोर्चे पर भी विभाग सख्त हुआ है। पिछले एक वर्ष में 700 से अधिक इमारतों का निरीक्षण किया गया, जिनमें 250 भवनों में गंभीर खामियां पाई गईं। इन भवनों को सुधार के लिए एक माह का समय दिया गया है, अन्यथा सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी। आंकड़ों के अनुसार बीते एक वर्ष में लखनऊ में 2848 से अधिक अग्निकांड हुए, जिनमें दो लोगों की मौत हुई, जबकि इस वर्ष जनवरी से मार्च के बीच ही 634 घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
