प्रीपेड मीटर के खिलाफ लोकसभा में दाखिल की याचिका, उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने लगाया जबरिया प्रीपेड मीटर लगाने का आरोप
लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर मामले में उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने लोकसभा में याचिका दाखिल की है। इसमें अध्यक्ष ने राज्य की बिजली कंपनियाें पर विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।
परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने लोकसभा की याचिका समिति के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश जोशी के समक्ष याचिका दाखिल की है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन और राज्य की डिस्कॉम कंपनियां उपभोक्ताओं की सहमति के बिना पुराने मीटरों को स्मार्ट प्रीपेड मीटर में बदल रही हैं। परिषद का कहना है कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत प्रीपेड मीटर केवल विकल्प के रूप में दिए जा सकते हैं, ये अनिवार्य नहीं हैं। इसके बावजूद आरडीएसएस योजना से करीब 3.8 करोड़ उपभोक्ताओं के मीटर बदलकर प्रीपेड किए जा रहे हैं। लगभग 70 लाख मीटर बिना उपभोक्ताओं की सहमति के प्रीपेड किए जा चुके हैं। नए बिजली कनेक्शन भी अनिवार्य रूप से प्रीपेड मीटर के साथ दिए जा रहे हैं। परिषद अध्यक्ष ने कहा कि इस मामले में 2 अप्रैल 26 को संसद में पूछे गए प्रश्न के जवाब में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर स्पष्ट कर चुके हैं कि प्रीपेड मीटर केवल उपभोक्ता की मांग पर ही लगाए जा सकते हैं। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने 1 अप्रैल-26 को जारी अधिसूचना में भी प्रीपेड मीटर अनिवार्य न होने की बात कही है।
याचिका में परिषद की प्रमुख मांगें
-पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
-विद्युत अधिनियम 2003 का पालन कराया जाए
-बिना सहमति प्रीपेड में बदले मीटरों को हटाया जाए
-नए कनेक्शनों में प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता समाप्त हो।
-दोषी अधिकारियों और कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
