Moradabad: केंद्रों पर इंतजाम, फिर भी नहीं बढ़ रहा अन्नदाता का रुझान
मुरादाबाद, अमृत विचार। जिले में वर्तमान सत्र में गेहूं खरीद के लिए सरकारी क्रय केंद्रों पर इंतजाम होने के बाद भी अन्नदाता का रूझान नहीं बढ़ रहा है। किसान खुले बाजाार में या साहूकारों के हाथों गेहूं की उपज बेचने में अधिक रुचि दिखा रहे हैं। क्योंकि उन्हें उपज का अधिक मूल्य नकद में मिल रहा है। जिससे वह खुले बाजार में गेहूं बेचने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
रबी फसलों की खरीद के लिए इस बार 31 मार्च से सत्र शुरू हुआ जो 15 जून तक चलेगा। इसके लिए मुरादाबाद जिले में 69 सरकारी क्रय केंद्र बनाए गए हैं। जिसमें खाद्य विभाग के अलावा विभिन्न एजेंसियों नेफेड, यूपीएसएस आदि के क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर इलेक्ट्रानिक तौल कांटा और डस्टर, बोरे आदि का प्रबंध किया गया है, लेकिन लगभग 15 दिन होने को हैं और मुश्किल से इन केंद्रों पर 494 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई है।
इन केंद्रों पर सरकार के द्वारा निर्धारित 2585 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीद कर आधार कार्ड से लिंक बैंक खाते में धनराशि 72 घंटों अर्थात तीन दिन में हस्तांतरित की जा रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक दाम किसानों को खुले बाजार में और साहूकारों के हाथ मिल रहा है। इससे वह सरकारी क्रय केंद्रों से मुंह मोड़ रहे हैं।
जिला खाद्य विपणन अधिकारी विनीता मिश्रा का कहना है कि पंजीकृत किसानों से क्रय केंद्रों पर पारदर्शिता के साथ गेहूं खरीद के सभी इंतजाम केंद्रों पर किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य किसानों का बिचौलियों के हाथों शोषण रोक कर उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है। खरीद अब बढ़ रही है। किसानों से सीधे भी संपर्क करने के लिए क्रय केंद्रों के प्रभारियों और विपणन निरीक्षकों को निर्देश दिया है कि वह उन्हें सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए प्रेरित करें।
