Lucknow Vikasnagar Fire Tragedy: मदद को बढ़े हाथ, अग्निकांड पीड़ितों को खुलकर मिल रहा सहयोग
लखनऊ, अमृत विचार: अलीगंज के विकासनगर में अग्निकांड के पीड़ित परिवारों के लिए लखनऊ वासियों ने दिल खोलकर मदद देनी शुरु कर दी है। घटना के चौथे दिन शनिवार को भी मदद पहुंचाने वालों का तांता लगा रहा।
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खाने के पैकेट से लेकर पानी की बोतलें, दवाएं, कपड़ें और चादर-बिस्तर तक पहुंचाने वालों की भीड़ देर शाम तक जुटी रही। इस दौरान घटना स्थल पर पुलिसकर्मी लगातार यह प्रयास करते दिखे कि लोगों की भीड़ की वजह से यातायात व्यवस्था बाधित न होने पाए और भीड़ न लगने पाए।
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घटनास्थल पर पहुंचते ही हमे सबसे पहले सान्या अस्पताला का मेडिकल कैंप दिखा जहां पर डाक्टर और नर्स की एक टीम लोगों की मदद करते मिली। जब उनसे पूछा गया कि आप कौन सी दवाएं दे रहे हैं तो डॉक्टरों ने बताया कि हम फर्स्ट एड जैसी दवाएं दे रहे हैं। अब तक करीब 100 से अधिक बर्न के मामले आ चुके हैं।
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जिसमें बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे समेत युवा भी है जो सामानों को बचाने के कारण हल्का फुल्का जल गए हैं। पास में ही एक टेंट में कपड़े और राशन जमा करने के लिए स्टॉल लगा दिया गया है, जहां पर लोग जरुरत के सामान जमा कर सकते हैं जिसे जरुरतमंदों को दिया जा रहा है।
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झुग्गी-झोपड़ियों में दिखी दर्जन भर जली मोटर साईकिलें
घटनास्थल पर जले हुए बर्तन और सामान का जगह-जगह ढेर लगा हुआ है। जिमसें करीब 30 से 40 तो साईकिले जली हुई दिखी। साथ ही अलग-अलग स्थानों पर दर्जन भर से अधिक मोटरसाईकिलें भी फूंकी हुई दिखाई पड़ी। यहां पर रहने वाले इदरीस और साहिद बाराबंकी और सीतापुर के निवासी हैं। वह मोटरसाईकिल पर ही घूम-घूम कर फेरी लगाया करते थे लेकिन अब कैसे परिवार पालेंगे इसी चिंता में डूबे दिखे।
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साहब पैसा दो, सामान बहुत आ गया
यहां पर दिनभर लोगों को जरुरत का सामान देने वालों की भीड़ लगी रही। हालात यह है कि पानी की बोतले और कपड़ें अब लोगों ने जमा करना शुरु कर दिया है। भोजन पैकेट भी पर्याप्त मात्रा में मिल गए हैं।
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एक महिला कपड़ा बांटने वाले एक व्यक्ति से कहती रही कि कपड़ा मत दीजिए पैसा दीजिए। यहां की निवासी पूजा कुमारी घरों में झाड़ू पोंछा करती है। वह नियमित साईकिल चलाकर विकासनगर के विभिन्न घरों में जाती है लेकिन उसकी साईकिल जल गई है।
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कुछ बचा ही नहीं उसमें लोहा का अवशेष छोड़कर। उसका पति शादी विवाह में ढोल तासा बजाता है जब काम मिल जाता है, बाकी समय बेरोजगारी में कटता है। पूजा के सामने यक्ष प्रश्न है कि अब कैसे समय से हर घर में पहुंच पाएगी।
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