फ्लैशबैक: आर के नारायण के उपन्यास पर बनी कालजयी फिल्म ‘गाइड’

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Published By Anjali Singh
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नवकेतन बैनर के तले बनी देव आनंद की फिल्म ‘गाइड’ 6 दिसंबर 1965 को रिलीज हुई थी। इस फिल्म को बने 61 साल हो गए हैं। इस फिल्म को भारतीय हिंदी सिनेमा के इतिहास में कल्ट क्लासिक होने का गौरव प्राप्त है। फिल्म में देव आनंद ने राजू नाम के गाइड की भूमिका निभाई थी,  जो रोजी (वहिदा रहमान) के प्रति आकर्षित होता है और उसे डांसर बनने के लिए प्रेरित करता है। प्रेम, लालच, पतन और अंततः आत्मज्ञान को दर्शाती यह फिल्म भारतीय रिश्तो के बदलते उतार-चढ़ाव को दिखती है। फिल्म में किशोर साहू, लीला चिटनिस, अनवर हुसैन, गजानन जागीरदार, प्रेम सागर, कृष्ण धवन और उल्लास आदि ने भी विभिन्न भूमिकाएं निभाई हैं।

फिल्म राजू गाइड की कहानी है, जिसकी मुलाकात मार्को और उसकी पत्नी रोजी से होती है। मार्को द्वारा अपेक्षित होने पर राजू रोजी को सहारा देता है और रोजी को नृत्य के प्रति जुनून को पहचानकर उसे प्रसिद्ध नृत्यांगना बनाने में मदद करता है। दोनों के बीच प्यार हो जाता है और समय के साथ दोनों अमीर भी हो जाते हैं, लेकिन राजू के मन में लालच और असुरक्षा की भावना आ जाती है। वह रोजी के जाली दस्तखत कर अपराध करता है और जेल चला जाता है। जेल से छूटने के बाद एक मंदिर में शरण लेता है। गांव वाले उसे साधु समझ लेते हैं। जब गांव में सूखा पड़ता है, तो राजू गांव के लिए उपवास रखता है और अंत में अपने नि:स्वार्थ त्याग के माध्यम से जीवन से मुक्ति पा जाता है।

यह फिल्म ‘मालगुडी डेज’ वाले लेखक आरके नारायण के उपन्यास ‘गाइड’ पर आधारित थी। आरके नारायण एक जाने-माने लेखक थे और उनकी एक किताब दुनियाभर में तारीफें बटोर रही थी। एक बार किसी ने देव साहब को यह किताब पढ़ने को दी। उन्हें इसकी कहानी अच्छी लगी और उन्होंने इस पर फिल्म बनाने का निर्णय लिया। हालांकि मूल उपन्यास और फिल्म की कहानी में कुछ अंतर भी है। फिल्म में राजू रोजी का प्यार पाने के लिए जतन करता है, लेकिन फिल्म में रोजी पहले से ही अपनी शादी से दुखी है।

देव आनंद ने हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में इस फिल्म को बनाने का निर्णय लिया।  देव आनंद ने फिल्म के निर्देशन का जिम्मा पहले अपने भाई चेतन आनंद को दिया था। चेतन वहीदा रहमान की जगह फिल्म में लीला नायडू को लेना चाहते थे, क्योंकि वह अच्छी डांसर थी, लेकिन देव साहब इसके लिए तैयार नहीं हुए। फिल्म के शूटिंग के दौरान भी देव आनंद और चेतन आनंद के बीच कुछ मतभेद उभर आए। नतीजन चेतन आनंद ने फिल्म ही छोड़ दी और वह अपनी फिल्म ‘हकीकत’ बनाने में जुट गए। उसके बाद फिल्म को निर्देशित करने की जिम्मेदारी देव आनंद ने अपने दूसरे भाई विजय आनंद ( गोल्डी) को दी। फिल्म ने सफलता के नए प्रतिमान स्थापित किए। पहली बार गाइड में एंटी हीरो की भूमिका की झलक देव आनंद के चरित्र में दिखाई देती है।

फिल्म के गाने लिखने की भी अलग कहानी है। पहले गाने लिखने के लिए हसरत जयपुरी को साइन किया गया था, लेकिन उनके लिखे एक गाने की लाइन देव आनंद को पसंद नहीं आई। उसे बदलने को कहा गया परंतु हसरत ने ऐसा करने से इनकार कर दिया और फिल्म ही छोड़ दी। इसके बाद शैलेंद्र को फिल्म में लिया गया, जिन्होंने फिल्म के सारे गीत लिखे। देव आनंद और वहीदा रहमान पर फिल्माए गीत।

आज फिर जीने की तमन्ना है’ क्लासिक बन गया और सुपरहिट गीतों में शामिल हुआ। फिल्म में गीतों को लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, किशोर कुमार ,मन्ना डे और एसडी बर्मन ने अपनी आवाजें दी है। फिल्म गाइड बॉक्स ऑफिस का सुपरहिट रही और आज भी बहुत पसंद की जाती है। कई फिल्म फेयर पुरस्कार इस फिल्म को प्राप्त हुए, जिसमें सर्वश्रेष्ठ फिल्म, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, अभिनेत्री, निर्देशक, लेखक और छायाकार शामिल हैं।-दीपक नौगांई ' अकेला 'लेखक, हल्द्वानी

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