Uttrakhand: प्रतिबंधित कुत्ते भी पाल रहे हल्द्वानीवासी, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन से खुलासा

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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पवन नेगी, हल्द्वानी। प्रतिबंधित आक्रामक स्वभाव के कुत्तों को भी हल्द्वानीवासी पालतू बनाकर घरों में रखे हुए हैं। इसका खुलासा नगर निगम की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व्यवस्था से हुआ जिसमें पालतू कुत्तों को पंजीकृत कराना आवश्यक है।

दरअसल, शहर में पालतू कुत्तों के पंजीकरण को लेकर नगर निगम की ऑनलाइन व्यवस्था उम्मीद के मुताबिक रफ्तार नहीं पकड़ सकी, लेकिन इसके बावजूद हाल के दिनों में पंजीकरण संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खास बात यह है कि प्रतिबंधित ब्रीड के कुत्तों का भी पंजीकरण किया जा रहा है।

नगर निगम की ओर से पिछले साल ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया था। इसका मकसद था कि अधिक से अधिक लोग अपने पालतू कुत्तों का पंजीकरण आसानी से करा सकें।
शुरुआत में उम्मीद जताई गई थी कि डिजिटल सुविधा से बड़ी संख्या में शहरवासी अपने पालतू कुत्तों का पंजीकरण कराएंगे, लेकिन निगम के आंकड़े बताते हैं कि यह लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हो सका।

इसके अलावा 32 पंजीकरण नवीनीकरण के लिए भी आवेदन किए गए हैं। नगर निगम के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. तोलिया ने स्पष्ट कहा कि प्रतिबंधित ब्रीड के कुत्तों को पालना गलत है और इससे सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

उन्होंने बताया कि निगम के पोर्टल में सभी ब्रीड के लिए विकल्प मौजूद हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि प्रतिबंधित कुत्तों को वैध माना जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रतिबंधित ब्रीड का कुत्ता किसी को काटता है, तो संबंधित मालिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अन्य पालतू जानवरों के काटने की स्थिति में मालिक से जुर्माना वसूला जाता है।

प्रतिबंधित ब्रीड पालना नियमों के विरुद्ध
निगम के ताजा आंकड़ों के अनुसार अब तक कुल 2856 पालतू कुत्तों का पंजीकरण किया जा चुका है। इनमें 57 कुत्ते ऐसे हैं जो प्रतिबंधित ब्रीड की श्रेणी में आते हैं। इन ब्रीड में पिटबुल, रॉटव्हीलर, वूल्फ डॉग्स, केन कॉर्सो और टोसा इनू जैसे कुत्ते शामिल हैं, जिन्हें भारत में पालना नियमों के विरुद्ध माना जाता है।

2018 में शुरू हुआ था मैनुअल पंजीकरण
हल्द्वानी। नगर निगम में पालतू कुत्तों के पंजीकरण की मैनुअल प्रक्रिया 2018 में शुरू हुई थी, जिसमें सभी शहरवासियों को अपने पालतू कुत्तों व अन्य जानवरों का पंजीकरण करना अनिवार्य था। जागरुकता के अभाव में लंबे समय तक लोगों ने पंजीकरण नहीं कराया। निगम ने जब पिछले साल पंजीकरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया था, तो उस समय मात्र 300 कुत्तों का पंजीकरण निगम में हुआ था।

आए दिन होती हैं कुत्तों के काटने की घटनाएं
शहर में आए दिन कुत्तों के काटने के मामले सामने आते हैं। बीते महीनों में भी शहर में कई जगह घटनाएं हुईं। मल्ली बमौरी में कुत्तों ने एक के बाद एक कई लोगों को काटकर घायल कर दिया था। इसके अलावा दमुवाढूंगा सहित कई अन्य जगह इस तरह के मामले देखने को मिले।

 

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