लखनऊ : माइग्रेन के इलाज में होम्योपैथी बनी संजीवनी

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Published By Virendra Pandey
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पंकज द्विवेदी, लखनऊ, अमृत विचार : आधुनिक जीवनशैली और बढ़ते तनाव के बीच माइग्रेन एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह सामान्य सिरदर्द नहीं, बल्कि एक न्यूरोलॉजिकल विकार है, जिसमें सिर के एक हिस्से में तेज दर्द, मतली, उल्टी और रोशनी व आवाज के प्रति संवेदनशीलता जैसे लक्षण शामिल होते हैं। इसके प्रमुख कारणों में मस्तिष्क का रासायनिक असंतुलन, हार्मोनल बदलाव, तनाव, नींद की कमी और अनियमित खान-पान शामिल हैं।

इस समस्या के समाधान के लिए जानकीपुरम स्थित केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान में विशेष माइग्रेन प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। अनुसंधान अधिकारी डॉ. दिव्या वर्मा के नेतृत्व में चल रहे इस प्रोजेक्ट के तहत बड़ी संख्या में मरीजों का उपचार किया गया है और कई मामलों में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। संस्थान की प्रभारी अधिकारी डॉ. लिपिपुष्पा देबता के अनुसार यहां निरंतर अनुसंधान और उपचार कार्य किए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि होम्योपैथी उपचार न केवल लक्षणों को कम करता है, बल्कि बीमारी के मूल कारणों पर भी प्रभाव डालता है, जिससे मरीजों को दीर्घकालिक राहत मिल सकती है। वहीं बचाव के लिए नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और तनाव नियंत्रण जरूरी है।

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