Ganga Expressway : आध्यात्मिक पर्यटन को नई दिशा देने में अहम भूमिका अदा करेगा गंगा एक्सप्रेसवे, पीएम मोदी कल करेंगे उद्घाटन
लखनऊ। गंगा एक्सप्रेस-वे के उत्तर प्रदेश में आध्यात्मिक पर्यटन को नई दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरने की उम्मीद है। गंगा को भारत की आस्था की सबसे पवित्र धारा माना जाता है और इसके किनारे बसे तीर्थस्थल सदियों से श्रद्धालुओं की श्रद्धा के केंद्र रहे हैं। अब गंगा एक्सप्रेस-वे इन धार्मिक स्थलों को एक मजबूत तीर्थ सर्किट में जोड़ने का कार्य करेगा।
मेरठ से प्रयागराज तक बनने वाला गंगा एक्सप्रेस-वे प्रदेश के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों को सीधे जोड़ेगा। इसके माध्यम से गढ़मुक्तेश्वर, कल्कि धाम, बेल्हा देवी धाम, चंद्रिका देवी शक्ति पीठ और त्रिवेणी संगम जैसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों तक पहुंच पहले की तुलना में अधिक आसान और तेज हो जाएगी।
इन स्थलों पर हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यह एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहे पांच प्रमुख स्पिरिचुअल कॉरिडोर को भी मजबूत आधार देगा। इन कॉरिडोरों का उद्देश्य राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों को एक व्यवस्थित धार्मिक पर्यटन नेटवर्क में जोड़ना है, ताकि श्रद्धालु एक ही यात्रा में कई महत्वपूर्ण तीर्थों के दर्शन कर सकें।
प्रयागराज-विंध्याचल-काशी कॉरिडोर इस दिशा में विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। त्रिवेणी संगम से विंध्याचल देवी धाम और आगे काशी तक की यात्रा अधिक तेज और सुगम होगी। यह कॉरिडोर शक्ति और शिव के प्रमुख तीर्थों को जोड़ते हुए धार्मिक पर्यटन का एक सशक्त मार्ग बनेगा। प्रयागराज-अयोध्या-गोरखपुर कॉरिडोर रामभक्ति से जुड़े प्रमुख स्थलों को जोड़ेगा।
प्रयागराज से अयोध्या में रामलला के दर्शन और आगे गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर तक पहुंच आसान होगी। इससे रामायण परंपरा से जुड़े तीर्थों का एक मजबूत धार्मिक सर्किट विकसित होगा। प्रयागराज-लखनऊ-नैमिषारण्य कॉरिडोर भी आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। नैमिषारण्य को वह पवित्र स्थान माना जाता है जहां 88 हजार ऋषियों ने तपस्या की थी और अनेक पुराणों का वाचन हुआ था। बेहतर सड़क संपर्क के कारण यह क्षेत्र भी बड़े आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में उभर सकता है।
रामायण से जुड़े स्थलों को जोड़ने वाला प्रयागराज-राजापुर-चित्रकूट कॉरिडोर भी गंगा एक्सप्रेस-वे से नई गति पाएगा। राजापुर, जो गोस्वामी तुलसीदास की जन्मभूमि है, और चित्रकूट, जहां भगवान राम के वनवास से जुड़े पवित्र स्थल हैं, अब श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुलभ होंगे।
इसके अतिरिक्त प्रयागराज-मथुरा-वृंदावन-शुकतीर्थ कॉरिडोर कृष्ण भक्ति से जुड़े प्रमुख स्थलों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा। मथुरा और वृंदावन पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन केंद्र हैं। बेहतर कनेक्टिविटी से यहां देशी और विदेशी श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के आध्यात्मिक पर्यटन को "डेस्टिनेशन से सर्किट" में बदलने की क्षमता रखता है।
अब तक श्रद्धालु अक्सर एक ही तीर्थ पर जाकर लौट आते थे, लेकिन बेहतर सड़क नेटवर्क बनने के बाद वे एक ही यात्रा में कई धार्मिक स्थलों का दर्शन कर सकेंगे। इससे धार्मिक पर्यटन की अवधि, खर्च और स्थानीय आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। एक्सप्रेस-वे के आसपास होटल, धर्मशाला, स्थानीय बाजार, परिवहन सेवाएं, हस्तशिल्प और प्रसाद से जुड़े छोटे व्यवसाय तेजी से विकसित होंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, काशी, अयोध्या, प्रयागराज, मथुरा और नैमिषारण्य जैसे तीर्थ जब आधुनिक एक्सप्रेस-वे और धार्मिक कॉरिडोर से जुड़ेंगे, तब उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र बन सकता है। गंगा एक्सप्रेस-वे केवल दूरी कम नहीं कर रहा, बल्कि यह आस्था की यात्रा को सरल बनाकर प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नए युग से जोड़ रहा है।
