मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना : 66 बेटियों की शादी कर निभाई अभिभावक की जिम्मेदारी, 10 हजार से अधिक बच्चों को मिल रहा योजना का लाभ
लखनऊ, अमृत विचार : योगी सरकार बेसहारा बेटियों के लिए अभिभावक की भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) के तहत अब तक 66 बेटियों की शादी कराई जा चुकी है, जिससे उनके जीवन में माता-पिता की कमी को काफी हद तक पूरा करने का प्रयास किया गया है।
सरकार प्रत्येक बेटी के विवाह के लिए 1,01,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, ताकि वे सम्मानजनक तरीके से अपना नया जीवन शुरू कर सकें। यह योजना उन बच्चों के लिए शुरू की गई थी, जिन्होंने कोविड-19 के दौरान अपने माता-पिता या अभिभावकों को खो दिया था। वर्तमान में इस योजना के तहत 10,904 से अधिक बच्चों को लाभ मिल रहा है। सरकार बच्चों के भरण-पोषण के लिए प्रति माह 4000 रुपये की सहायता दे रही है, जो 18 वर्ष की आयु या 12वीं कक्षा तक जारी रहती है। शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 8085 लैपटॉप वितरित किए गए हैं, जिससे बच्चे डिजिटल शिक्षा से जुड़ सकें। वहीं, 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और अटल आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा दी जा रही है, साथ ही 12,000 रुपये वार्षिक अतिरिक्त सहायता भी मिल रही है।
महिला कल्याण निदेशालय की निदेशक डॉ. वंदना वर्मा के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा या बेटी खुद को असहाय न महसूस करे और सभी को समान अवसर मिल सकें।
सुरक्षित भविष्य के लिए विशेष प्रावधान
जिन बच्चों का कोई अभिभावक नहीं है, उनके लिए सरकारी संस्थानों में निःशुल्क आवास की व्यवस्था की गई है। साथ ही उनकी संपत्ति की सुरक्षा के लिए जिलाधिकारी को संरक्षक बनाया गया है। इसके अलावा 18 से 23 वर्ष के युवाओं को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रति माह 2500 रुपये तक की सहायता दी जा रही है, जिससे वे अपने सपनों को साकार कर सकें।
