यूपी में किसानों की बल्ले-बल्ले! हाईटेंशन टावर की जमीन के लिए अब मिलेगा मोटा मुआवजा

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Published By Anjali Singh
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लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश सरकार ने किसानों के हक में एक बड़ा कदम उठाते हुए खेतों में होकर गुजरने वाली 765 केवी, 400, 220 और 132 केवी की 'हाईटेंशन लाइनों' (अधिक वोल्टेज वाले विद्युत पारेषण तार) के टावर (खंभों) के नीचे आने वाली जमीनों का दोगुना मुआवजा देने का फैसला किया है। सोमवार को मंत्रिमंडल ने ऊर्जा विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। उप्र के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को संपन्न हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। 

पत्रकार वार्ता में वित्‍त मंत्री सुरेश कुमार खन्‍ना के साथ मौजूद ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि इस दिशा में भारत सरकार ने नये निर्देश जारी किये हैं और दो बहुत अच्छी व्यवस्था किसानों के हित में उप्र सरकार ने अपनाने का निर्णय लिया गया है। शर्मा ने बताया कि पहला निर्णय यह है कि खेतों में जो बिजली के टावर लगाए जाते हैं, वह चार खंभों वाले पाये पर टिके होते हैं। 

शर्मा ने कहा कि इन टावर के खंभों के बीच की जमीन के अलावा हर खंभे के चारों आरे एक मीटर की त्रिज्या में जो भी अतिरिक्त जमीन आएगी, इन दोनों भाग के कुल क्षेत्रफल की जितनी भी कीमत होगी उसका दो सौ प्रतिशत (दोगुना) मुआवजा दिया जाएगा। उन्‍होंने कहा कि इसी प्रकार तार खींचने से जो खेती प्रभावित होती है, उसमें जमीन की कीमत का 30 प्रतिशत देने का प्रस्ताव है। 

शर्मा ने कहा कि आज मंत्रिमंडल की बैठक में इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि इस प्रकार 765, 400, 220 और 132 केवीए के हाईटेंशन लाइनों से होने वाली क्षति के तहत किसानों को मिलने वाले मुआवजे में 21 प्रतिशत से लेकर 33 प्रतिशत तक अनुमानित वृद्धि होने की संभावना है। किसानों को इसमें ज्यादा लाभ होगा। शर्मा ने पूर्ववर्ती स्थितियों पर चर्चा करते हुए कहा कि हाईटेंशन तार (765 केवी, 400 केवी, 220 और 132 केवी की लाइनें) जिन बड़े-बड़े खंभों के जरिये ले जाए जाते हैं उन खंभों के नीचे की किसानों की भूमि प्रभावित होती है, इसलिए इस भूमि के लिए किसानों को मुआवजा मिलना चाहिए। 

उन्‍होंने कहा कि इस पर 2015 और 2018 में भारत सरकार के निर्देशानुसार व्यवस्था बनी थी। शर्मा ने कहा कि 2018 के पहले खंभे के नीचे के क्षेत्रफल का कोई मुआवजा मिलता ही नहीं था। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में इस बारे में व्यवस्था बनी, लेकिन किसान इससे संतुष्ट नहीं थे। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि इस तरह के विद्युत तार ले जाने और टावर लगाने में बहुत दिक्कत आती थी, क्योंकि मुआवजे का कोई प्रावधान ही नहीं था। 

इसके चलते सरकार को किसानों का सहयोग नहीं मिल पाता था। शर्मा ने कहा कि इस दिशा में भारत सरकार ने नये निर्देश जारी किये और ये दो बहुत अच्छी व्यवस्था राज्य सरकार ने किसानों के हित में अपनाने का निर्णय लिया है, जिसे आज मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी। उन्होंने कहा यह किसानों के हित में बड़ा कदम है।

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