बाराबंकी : आंधी बारिश से शहर गांव बेहाल, बिजली आपूर्ति ध्वस्त, लुढ़का पारा
बाराबंकी, अमृत विचार। एक सप्ताह के भीतर मौसम ने तीसरी बार करवट ली। सोमवार सुबह घने बादलों ने अंधेरा कर दिया, कुछ ही पलों में तेज आंधी ने फिर जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया। इसके बाद लहरा के बरसे बादलों ने जमकर जलभराव किया। एकबारगी मौसम सर्द हो गया, वहीं आकाशीय बिजली की कड़कड़ाहट से लोग घबरा उठे। बिजली आपूर्ति फिर बेपटरी हुई और फील्ड स्टाफ के हाथ पांव फूल गए।
सप्ताह भर के अंदर बारिश, आंधी वाले मौसम को लेकर लोग हैरान थे ही कि सोमवार सुबह सामान्य मौसम ने अचानक पलटी मारी। आसमान पर छाए घने काले बादलों ने ऐसा अंधेरा किया कि घर के अंदर उजाला करना पड़ा तो मार्गाें पर वाहनों की हेडलाइट जल गईं। लोग अंदाजा लगा ही रहे थे कि तेज हवाओं ने आंधी का रूप ले लिया। आंधी के साथ जिले में अनगिनत जगहों पर टीनशेड़ उड़े, पेड़ व बिजली के खंभे धराशायी हो गए।
उड़ती धूल पर कुछ ही पलों बाद हुई बारिश ने काबू किया पर झूम झूमकर बरसे बादलों ने किसी को संभलने का मौका नहीं दिया। ऐसा पानी बरसा कि शहर में जगह जगह जलभराव हो गया। निरीक्षण पर आए प्रभारी मंत्री को भी जलभराव से होकर गुजरना पड़ा। नाले, नालियां उफना गईं और गंदा पानी सड़क पर बहता रहा। सबसे बड़ी परीक्षा बिजली विभाग को देनी पड़ी, सोमवार के बदलाव ने बिजली आपूर्ति को ध्वस्त करके रख दिया।
शहरी इलाके में तो कुछ घंटे लगे पर तहसील, कस्बा, नगरीय व ग्रामीण इलाकों में ऐसी बिजली गुल हुई कि शाम तक आपूर्ति शुरु नहीं हो सकी। मोबाइल बंद होते ही संपर्क टूट गया। गनीमत यह कि बदले मौसम की वजह से पारा लुढ़का तो बिजली की कमी कम महसूस हुई वरना स्थिति बड़ी ही विस्फोटक हो जाती। हालांकि लगातार आपूर्ति पर हो रही चोट के बाद व्यवस्था सुचारु करने में विभाग को नाकों चने चबाने पड़े। उधर आंधी बारिश का विपरीत असर खरबूज, तरबूज आदि फसलों पर पड़ा लेकिन मेंथा के लिए यह बारिश मुफीद साबित हुई।
रामसनेहीघाट प्रतिनिधि के अनुसार तेज आंधी और तूफान से बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। विद्युत वितरण खंड के अधिशासी अभियंता विमलेश ने बताया कि आंधी की चपेट में आकर करीब 25 स्थानों पर बिजली के खंभे धराशायी हो गए, जिससे तीन दर्जन से अधिक गांवों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। अचानक आई इस आपदा से ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। आंकलन के अनुसार विभाग को 5 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। बिजली गुल होने से पेयजल, घरेलू कामकाज और खेती-किसानी पर भी असर पड़ा है।
