Bengal Election Result : अंग बंग कलिंग जीता, मां माटी मानुष पड़ा फीका  

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
On

मनोज त्रिपाठी, चुनाव डेस्क: पश्चिम बंगाल दशकों से भाजपा के लिए एक अधूरे प्रोजेक्ट जैसा था। भाजपा के पूर्ववर्ती जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिन्होंने देश में हिंदुत्व की दिशा को धार दी, इसी राज्य के थे। ऐसे में बंगाल की जीत भाजपा के लिए बड़ी वैचारिक सफलता की ध्वज वाहक भी है। इस बार पार्टी ने ममता की विफलताओं को उजागर करने के साथ रणनीतिक कौशल दिखाया। आक्रामक अभियान चलाकर हिंदू मतदाताओं का बड़ा हिस्सा अपनी तरफ आकर्षित करने के साथ महिला सुरक्षा को इतना बड़ा मुद्दा बना दिया कि ममता सरकार की कल्याणकारी योजनाएं फीकी पड़ गईं। इसी के साथ पार्टी का अंग-बंग और कलिंग' (बिहार, बंगाल और ओडिशा) में सत्ता हासिल करने का पुराना सपना भी साकार हो गया।       

IMG_0650.JPG

अंग-बंग और कलिंग' का जयघोष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान किया था। किसी समय यही त्रिकोण भारत की दिशा और दशा तय करता था। भाजपा अंग और कलिंग पर तो  पहले से ही काबिज ही थी, अब पहली बार बंग पर भी भगवा झंडा फहरा दिया है। पश्चिम बंगाल में साल 2016 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को तीन सीटें मिली थीं। यहां से 2021 के चुनाव में पार्टी 77 सीटों पर पहुंची और इस बार कमाल दिखाते हुए सीटों की संख्या के लिहाज से दोहरा शतक लगाने के साथ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी भवानीपुर में धूल चटा दी।

cats

मां माटी मानुष का तिलिस्म, एम फैक्टर से ही तोड़ा
 
पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के लिए ‘मां, माटी, मानुष‘ का गढ़ा और 2011 के विधानसभा चुनाव में 34 साल पुरानी वाम सरकार को हरा दिया। 2016 और 2021 में भाजपा पर भी यह नारा जमकर भारी पड़ा। लेकिन 2026 के चुनाव में यह नारा भाजपा और टीएमसी के बीच तीखे वैचारिक संघर्ष का केंद्र बन गया। मोदी ने प्रचार अभियान में हमला बोलते हुए कहा कि आज 'मां' रो रही है, 'माटी' असुरक्षित है और 'मानुष' भयभीत हैं। पार्टी ने टीएमसी के नारे को उसके मुस्लिम प्रेम, महिला असुरक्षा और ममता की विफलता का नैरेटिव बना दिया।  

6 साल ममता के साथी, 6 साल में पलटी पूरी बाजी
               
तृणमूल कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाने वाले नंदीग्राम आंदोलन के मुख्य वास्तुकार रहे शुभेंदु अधिकारी  छह साल तक ममता बनर्जी सरकार में नंबर दो रहे, फिर नाराज हुए तो भाजपा के साथ आकर छह साल में ही पूरी बाजी पलट दी। ऐसे में बड़ा सवाल है कि शुभेंदु अब क्या भाजपा सरकार में नंबर वन यानी मुख्यमंत्री बनेंगे या फिर ममता सरकार की तरह नंबर दो की भूमिका में ही नजर आएंगे। 

MUSKAN DIXIT (1)

शुभेंदु ने वर्ष 2006 में पहली बार कांथी दक्षिण सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता था। वर्ष 2009 में उन्होंने तमलुक सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीते। 2014 में उन्होंने इसी सीट पर कब्जा बनाए रखा वर्ष 2016 में उन्होंने नंदीग्राम सीट से विधानसभा का चुनाव जीता और ममता सरकार के दूसरे कार्यकाल में परिवहन मंत्री बने। इस दौरान उनको नंबर दो कहा जाने लगा। लेकिन दिसंबर 2020 में भाजपा का दामन थामने और चार माह बाद 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराने के बाद उनको न सिर्फ ख्याति मिली, बल्कि भाजपा के लिए भरोसेमंद बन गए। विधानसभा में विपक्ष के नेता बनाए गए। इसके बाद बीते पांच साल शुभेंदु लगातार ममता सरकार पर हमलावर रहे और तृणमूल के गढ़ों में सक्रियता और  आंदोलनों के जरिये भाजपा की जमीन मजबूत में जुट गए। केंद्रीय नेतृत्व ने भी उनकी मेहनत को सराहा और राज्य से संबंधित नीतिगत फैसलों में राय को अहम माना।  

दिलीप घोष

खड़गपुर सदर से भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने टीएमसी के प्रदीप सरकार पर 30 हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की। 2014 में दिलीप घोष आरएसएस से भाजपा में आए थे। 2015 में घोष को पश्चिम बंगाल में पार्टी की कमान सौंपी गई थी।

 



संबंधित समाचार